देशभर में कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू गया है और टीकाकरण के बाद किसी भी व्यक्ति में प्रतिकूल लक्षण दिखने पर दवा नियामक उस घटना की समीक्षा कर सकता है। एक ओर किसी प्रतिकूल घटना के मामले में टीका निर्माताओं को सरकार से किसी तरह की क्षतिपूर्ति मिलने की संभावना नहीं है तो वहीं, केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) इस बात की जांच करेगा कि क्या प्रतिकूल घटना एवं टीके के बीच कोई अंतर्संबंध है अथवा नहीं।
इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया, ‘यदि इनके बीच किसी तरह का संबंध स्थापित होता है, तो पूरी जिम्मेदारी निर्माता की होगी। टीके का अनुमोदन न्यू ड्रग्स ऐंड क्लिनिकल ट्रायल रूल्स, 2019 के प्रावधानों के अनुसार किया गया है, जो दवा एवं प्रसाधन कानून 1940 के तहत आता है। इस कानून में किसी भी तरह के परीक्षण के समय कोई गंभीर प्रतिकूल घटना होने के संबंध में मुआवजे का प्रावधान है।’
भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोवैक्सीन को ‘चिकित्सकीय परीक्षण मोड’ के तहत अनुमोदित किया गया है। इसका मतलब यह है कि नए दवा एवं चिकित्सकीय परीक्षण नियम टीके पर लागू होते हैं। हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान भारत बायोटेक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कृष्णा एल्ला ने कहा था कि कंपनी परीक्षण में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों की पूरी जिम्मेदारी लेगी। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने भी कहा है कि चिकित्सकीय परीक्षण दौर में कोवैक्सीन के प्रतिबंधित उपयोग का मतलब था कि लाभार्थियों को इसकी सहमति देनी होगी और उनकी नियमित तौर पर जांच होती रहेगी। ऐसे व्यक्तियों को प्लेसिबो नहीं मिलेगा।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशील्ड को मिले अनुमोदन में दवा नियामक ने शर्तों में उल्लेख किया है कि फर्म को भारत के परिप्रेक्ष्य में जोखिम प्रबंधन योजना प्रस्तुत करनी होगी और पहले दो महीनों तक हर 15 दिन का उचित विश्लेषण के साथ प्रतिकूल घटनाओं पर सुरक्षा डेटा भी प्रस्तुत करना है। इसके बाद, प्रतिकूल घटनाओं पर डेटा को मासिक तौर पर जमा करने की अनुमति होगी।
एक स्रोत ने स्पष्ट किया कि गंभीर प्रतिकूल घटनाओं की बारीकी से निगरानी की जाएगी क्योंकि टीकों में से किसी को भी पूर्ण विपणन प्राधिकरण हासिल नहीं है। उन्होंने बताया, ‘पहले, टीका निर्माता को उचित विश्लेषण के साथ डेटा जमा करना होगा और फिर सीडीएससीओ विशेषज्ञ समूह डेटा की जांच एवं विश्लेषण करेगा कि क्या किसी प्रतिकूल घटना एवं टीके में कोई अंतर्संबंध है। इस बीच, केंद्र ने राज्य सरकारों को भी टीकाकरण अभियान की देखरेख करने एवं स्वास्थ्य मंत्रालय को परिणाम की रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है। गुजरात के राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. नयन जानी ने कहा कि उन्हें दूसरी बूस्टर खुराक का प्रबंध करने से पहले 28 दिन के लिए टीका प्राप्तकर्ताओं की निगरानी करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा, ‘इसके बाद सभी रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएंगी।’
भारत की स्थिति अमेरिका जैसे देशों से भिन्न है जहां सार्वजनिक एवं आपातकालीन तैयारी अधिनियम के तहत टीका बनाने या वितरित करने वाली कंपनियों को कानूनी संरक्षण दिया गया है, बशर्ते कंपनी द्वारा ‘जानबूझकर कदाचार’ न किया गया हो। इसलिए, टीका निर्माताओं को मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई में नहीं उलझना पड़ेगा, जब तक कि ‘जानबूझकर कदाचार’ साबित नहीं होता। चिकित्सा-कानून क्षेत्र के वरिष्ठ जानकार ने कहा, ‘भारत में टीका निर्माताओं को क्षतिपूर्ति मिलने की संभावना नहीं है। यहां प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी होगी और 2019 के नए नियमों के अनुसार, टीका निर्माताओं को आवधिक डेटा जमा करना होगा। अगर किसी प्रतिकूल घटना के लिए टीके के साथ संबंध स्थापित होता है तो टीका निर्माता इसका जिम्मेदार होगा।’ उन्होंने कहा कि टीकाकरण को ‘स्वैच्छिक’ बनाकर सरकार ने सुनिश्चित किया है कि सरकार टीका लेने वाले व्यक्ति की ‘निहित सहमति’ ले रही है।