Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei
US-Israel Attack Iran: मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की हत्या की खबर के बाद देश में शोक और आक्रोश का माहौल है। इसी बीच ईरान की शक्तिशाली अर्धसैनिक इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश देते हुए बड़े सैन्य अभियान की चेतावनी दी है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं अब तक का सबसे तीव्र और व्यापक सैन्य अभियान शुरू करने की तैयारी में हैं। बयान में इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही गई है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका पैदा हो गई है।
ईरान के भीतर भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। देश के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह पर काला झंडा फहराया गया है। यह प्रतीक आमतौर पर शोक और बड़े राष्ट्रीय संकट के समय इस्तेमाल किया जाता है। दरगाह पर हजारों श्रद्धालु एकत्र हुए और उन्होंने खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। कई जगहों पर लोगों ने रैलियां निकालीं और हमले के खिलाफ नाराजगी जताई।
रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान के पाश्चर परिसर को निशाना बनाया गया, जहां खामेनेई का आवास और कार्यालय स्थित है। इसी परिसर में राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का दफ्तर भी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने संबोधन में कहा कि हमलों में “तानाशाह खामेनेई के परिसर” को ध्वस्त कर दिया गया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि खामेनेई मारे गए हैं और यह कार्रवाई अमेरिका और इजरायल की संयुक्त रणनीति का हिस्सा थी। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुरुआती घंटों में कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और शीर्ष नेतृत्व सुरक्षित है।
Ali Khamenei वर्ष 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उन्होंने Ruhollah Khomeini के बाद सत्ता संभाली और लगभग 40 वर्षों तक देश की राजनीति और सैन्य ढांचे पर निर्णायक नियंत्रण बनाए रखा। सर्वोच्च नेता के रूप में उनके पास सशस्त्र बलों की कमान, न्यायपालिका और राज्य की प्रमुख नीतियों पर अंतिम निर्णय का अधिकार था।
खामेनेई को उनके समर्थक इस्लामी क्रांति का संरक्षक मानते थे, जबकि आलोचकों का आरोप रहा कि उन्होंने असहमति को सख्ती से दबाया और सुधारवादी आवाजों को कुचल दिया।
सूत्रों के अनुसार, हाल के महीनों में क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका को देखते हुए खामेनेई ने सत्ता हस्तांतरण की संभावनाओं पर विचार किया था। ईरान के संविधान के तहत सर्वोच्च नेता का चयन ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ नामक धार्मिक विद्वानों की समिति करती है और उम्मीदवार वरिष्ठ शिया धर्मगुरु होना चाहिए।
बताया जा रहा है कि संभावित उत्तराधिकारियों में न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसनी एजई, खामेनेई के चीफ ऑफ स्टाफ अली असगर हेजाजी और सुधारवादी झुकाव वाले धर्मगुरु हसन खुमैनी के नाम शामिल थे। हसन खुमैनी, इस्लामी क्रांति के संस्थापक रुहोल्लाह खुमैनी के पोते हैं।
खामेनेई के पुत्र मोजतबा खामेनेई को भी कुछ गुटों का समर्थन हासिल बताया जाता है, लेकिन स्वयं खामेनेई ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया था कि वे सर्वोच्च नेतृत्व को वंशानुगत पद नहीं बनाना चाहते।
हमलों के बाद ईरान में नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। बताया जा रहा है कि संकट की स्थिति में निर्णय लेने के लिए खामेनेई ने अपने करीबी सहयोगियों का एक छोटा समूह अधिकृत किया था। इनमें संसद अध्यक्ष और पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर मोहम्मद बाकर गालिबाफ तथा सैन्य सलाहकार जनरल याह्या रहीम सफवी जैसे नाम शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, खामेनेई ने देश की दैनिक जिम्मेदारियां अपने करीबी सहयोगी अली लारिजानी को सौंप दी थीं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान किसी भी हमले का जवाब देगा और इसे भूलेगा नहीं।
तेहरान के कुछ इलाकों से मिली जानकारी के अनुसार, खामेनेई के विरोधी गुटों ने उनकी मौत की खबरों पर खुशी जताई। वहीं, उनके समर्थकों में आक्रोश और शोक का माहौल देखा गया। देश पहले से ही आर्थिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रहा है, ऐसे में शीर्ष नेतृत्व में बदलाव स्थिति को और जटिल बना सकता है।