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भारत-यूएई व्यापार समझौते में कड़े नियम

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Last Updated- December 11, 2022 | 9:09 PM IST

भारत और यूएई के बीच व्यापार समझौते में उत्पादों के विनिर्माण स्थान से संबंधित कड़े नियम तय किए गए हैं। इसमें निर्यातित उत्पादों में 40 फीसदी मूल्य संवर्धन जरूरी है ताकि भारत में यूएई के रास्ते किसी अन्य देश में बने उत्पादों को भेजे जाने से बचा जा सके।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि किसी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में विनिर्माण के स्थान के आधार पर ही वस्तुओं के मुक्त आयात को मंजूरी दी जाती है। इस व्यापार समझौते में 40 फीसदी मूल्य संवर्धन और विनिर्माण की जगह के प्रमाणपत्र की जरूरत होगी। यह प्रमाणपत्र यूएई के अर्थव्यवस्था मंत्रालय द्वारा जारी किया जाएगा। आम तौर पर व्यापार समझौतों में मूल्य संवर्धन का स्तर 30 से 35 फीसदी ही होता है। भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) के मामले में कुछ ऊंचे मूल्य वाले उत्पादों को मूल्य संवर्धन की ऐसी कड़ी शर्तों से छूट दी गई है।
इसके अलावा एक स्थायी द्विपक्षीय सेफगार्ड व्यवस्था पर सहमति बनी है ताकि किसी उत्पाद के आयात में अचानक भारी बढ़ोतरी से निपटा जा सके। ऐसा प्रावधान घरेलू उद्योग के बचाव के लिए शामिल किया गया है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक पिछले एफटीए में आयात में बढ़ोतरी की स्थिति में घरेलू उद्योग के बचाव के लिए पर्याप्त उपाय नहीं थे। उनके मुताबिक आसियान देशों के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर के बाद उनके साथ व्यापार घाटा होने लगा है।
ऐसा पहली बार हो रहा है, जब भारत विनिर्माण के स्थान के नियमों के साथ समझौता कर रहा है। इससे एफटीए के जरिये किसी अन्य देश का माल भारत में नहीं भेजा जा सकेगा।
भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ व्यापार समझौते से डेयरी, फल, खाद्यान्न, सब्जी, चाय, कॉफी, तंबाकू, डाई, साबुन, फुटवियर, पेट्रोलियम, टायर, खिलौने, एल्युमीनियम, तांबे के कबाड़, प्रोसेस्ड मार्बल आदि को बाहर रखा है। इसके अलावा घरेलू उद्योग के संरक्षण के लिए बाहर रखे गए कुछ उत्पादों की एक अलग सूची है, जिसमें डेयरी, चाय, कॉफी, मसाले, चीनी, तंबाकू आदि शामिल हैं।
वाणिज्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यन ने कल ही संवाददाताओं को बताया था कि जिन क्षेत्रों में विनिर्माण बड़े पैमाने पर होता है और जिन क्षेत्रों में सरकार ने उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की है, उन्हें नकारात्मक सूची में शामिल किया गया है।
भारत और यूएई ने शुक्रवार को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर हस्ताक्षर किए, जिससे मूल्य के लिहाज से भारत के 90 फीसदी निर्यातों को फायदा होने के आसार हैं।
यह समझौता यूएई में संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अगले 60 दिन में लागू होने के आसार हैं। यूएई अपनी 97 फीसदी से अधिक वस्तुओं यानी मूल्य के लिहाज से भारत के 99 फीसदी निर्यात पर शुल्क खत्म कर रहा है। भारतीय निर्यातकों को चमड़ा, फुटवियर, रत्नाभूषण, फर्नीचर जैसे श्रम बहुल क्षेत्रों में लगभग शून्य शुल्क वाला बाजार मिलेगा।
इस व्यापार समझौते से करीब 26 अरब डॉलर के भारतीय उत्पादों को फायदा मिलने के आसार हैं जिन पर यूएई 5 फीसदी आयात शुल्क लगाता है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब समझौते में बौद्धिक संपदा अधिकार, सरकारी खरीद, डिजिटल व्यापार पर चैप्टर शामिल किए गए हैं। सुब्रमण्यन ने कहा, ‘ये चैप्टर बहुत छोटे होंगे, लेकिन वे रुझान तय करेंगे और वे बड़ा वैश्विक खिलाड़ी बनने की भारत की मंशा के सूचक होंगे।’

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First Published - February 20, 2022 | 11:04 PM IST

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