इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार की सुबह इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई बड़े शहरों पर जोरदार हमला बोला। इस कार्रवाई में अमेरिका भी इजरायल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा दिखा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के सूत्रों ने बताया कि इस हमले में ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नसीरजादेह और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पकपूर की जान चली गई। दोनों ही ईरान की सेना के बड़े अफसर थे, जिनकी मौत से ईरान को बड़ा झटका लगा है। इस हमले की वजह से दक्षिणी ईरान में काफी नुकसान हुआ। वहां के होरमोजगान प्रांत में मिनाब और जास्क जैसे शहरों पर बम गिराए गए।
ईरानी स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 70 लोग मारे गए और 90 से ज्यादा घायल हो गए। सबसे दुखद खबर मिनाब से आई, जहां एक लड़कियों के स्कूल पर मिसाइल गिरी। ईरानी न्यूज एजेंसी फार्स ने बताया कि इस हादसे में 40 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 अन्य घायल हैं। ये बच्चियां स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं, जब अचानक ये हमला हुआ।
इजरायल ने इस अभियान को ‘शेर की दहाड़’ नाम दिया है। सेना ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के 10 शहरों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक वीडियो जारी कर इसकी वजह बताई। उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई अमेरिकी लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी थी। ट्रम्प पहले भी ईरान को चेतावनी दे चुके थे कि वो उसकी मिसाइलों को नेस्तनाबूद कर देंगे और मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करने की कोशिश करेंगे। ये हमला ऐसे समय हुआ जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों पर बातचीत चल रही थी। इस बातचीत में सबसे बड़ा पेंच बैलिस्टिक मिसाइलों का था। ईरान इसे अपनी रक्षा का अहम हिस्सा मानता है और किसी भी हाल में समझौता नहीं करना चाहता।
ईरानी नेता कहते हैं कि ये मिसाइलें उनके देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। उन्होंने जून 2025 के एक पुराने हमले का जिक्र किया, जब इजरायल और अमेरिका ने उनके परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, तब इन्हीं मिसाइलों ने बचाव किया। ईरान साफ कहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु कार्यक्रम तक रहेगी, मिसाइलों या दूसरे मुद्दों पर नहीं।
हमले के जवाब में ईरान ने भी कमर कस ली। उसने इजरायल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं। इतना ही नहीं, ईरान ने कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और यूएई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया। दुबई जैसे घनी आबादी वाले शहर पर भी हमला किया गया।
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उन्होंने ईरान से आने वाली कई मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया। दुबई में कुछ जगहों पर धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जो शायद मिसाइलों को रोकने के दौरान हुईं। इजरायल ने ईरान से एक और हमले की आशंका जताई है। सेना ने कई इलाकों में अलर्ट जारी किया और लोगों के फोन पर मैसेज भेजे। ये छठा मौका है जब शनिवार के हमलों के बाद ऐसी चेतावनी दी गई। सेना ने लोगों से कहा कि वो सुरक्षा के नियमों का पालन करें।
इस बीच, रूस भी कूद पड़ा है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बात की। लावरोव ने अमेरिका और इजरायल के हमलों की सख्त निंदा की और इन्हें बिना वजह की कार्रवाई बताया। रूस ने अपील की कि ऐसे हमले तुरंत रोके जाएं। ईरान और इजरायल के बीच ये तनाव लगातार बढ़ रहा है, और सुरक्षा एजेंसियां हर पल नजर रख रही हैं।
ईरान पर हमले के कुछ देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक 8 मिनट का वीडियो जारी कर इस पूरी कार्रवाई का ब्यौरा दिया। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि उनका लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना है। उन्होंने चेतावनी दी, “हम ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को पूरी तरह जमींदोज और नेस्तनाबूद कर देंगे।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उन्होंने तेहरान के साथ समझौते की कई कोशिशें की थीं, लेकिन ईरान ने हर मौका ठुकरा दिया। ट्रंप के मुताबिक, जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुई बमबारी के बाद ईरान फिर से अपना परमाणु कार्यक्रम खड़ा करने की कोशिश कर रहा था।
उन्होंने कहा, “वे अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने को तैयार नहीं थे, और अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।” इस ऑपरेशन के लिए अमेरिका ने मध्य पूर्व में 2003 के इराक युद्ध के बाद से अब तक का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा किया है, जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा विमान वाहक पोत ‘गेराल्ड आर. फोर्ड’ भी शामिल है।
मध्य पूर्व में छिड़ी इस जंग के बीच भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास ने इजरायल में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। भारत ने अपने नागरिकों से ‘अत्यधिक सावधानी’ बरतने और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है।