facebookmetapixel
Advertisement
पेपर लीक के खिलाफ कानून में संशोधन को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी, सोमवार को संसद में पेश होगा विधेयकभारी बारिश और बाढ़ का कहर: गुजरात में सेना ने संभाला मोर्चा, असम-महाराष्ट्र में भी हालात गंभीरचार साल के निचले स्तर पर पहुंची निजी कारोबारी गतिविधियां, महंगाई और पश्चिम एशिया तनाव से सुस्त पड़ी रफ्तारफ्रंट-रनिंग मामले में ऐक्सिस MF के पूर्व डीलर वीरेश जोशी पर 7 साल का प्रतिबंध, 3 करोड़ का जुर्माना भीरसायन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 3,030 करोड़ रुपये की ‘भव्य-रसायन’ योजना मंजूरCBDT को वित्त मंत्री की सख्त हिदायत, कहा: अभी भी 5.4 लाख अपीलें लंबित, मुकदमेबाजी रणनीति की करें समीक्षाUS Tariff on India: अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाया 10% टैरिफ, धारा 301 के तहत हुई कार्रवाईUpcoming IPO: देश का सबसे बड़ा हेल्थकेयर IPO ला रही मणिपाल हेल्थ, 29 जुलाई से खुलेगा इश्यूHindustan Zinc Q1 Results: दोगुने से ज्यादा बढ़ा मुनाफा, 5,469 करोड़ रुपये पर पहुंचा आंकड़ाबिना इंटरनेट चलने वाले Bitchat ऐप पर सरकार का शिकंजा, GitHub से कोड हटाने का दिया निर्देश

जी20 का मध्य सदी तक कार्बन न्यूट्रलिटी तक पहुंचने का वादा

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 11:51 PM IST

विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं ने सदी के तकरीबन मध्य तक कार्बन न्यूट्रलिटी लक्ष्य तक पहुंचने का रविवार को वादा किया। उन्होंने दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न करते हुए, स्कॉटलैंड के ग्लासगो में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के लिए यहां जमीनी कार्य किया।
जी20 नेताओं के अंतिम वक्तव्य के मुताबिक वे कोयला चालित ताप विद्युत संयंत्रों के लिए सार्वजनिक वित्त पोषण खत्म करने को सहमत हुए, लेकिन घरेलू स्तर पर कोयले का उपभोग चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया, जो शीर्ष कार्बन उत्सर्जकों- चीन और भारत के लिए एक स्पष्ट सहमति है।
कार्बन न्यूट्रेलिटी से तात्पर्य एक निर्धारित तिथि तक मानव जनित वार्षिक कार्बन डाइऑक्साइड गैस उत्सर्जन को शून्य के स्तर पर ले जाना है। जी20 देश, विश्व के ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के करीब तीन-चौथाई हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं। वे बढ़ते तापमान के प्रभावों से निपटने में गरीब देशों की मदद करते हुए उत्सर्जन घटाने के उपायों पर ठोस प्रतिबद्धता के लिए साझा आधार तलाश रहे हैं।
इसके बिना ग्लासगो में व्यापक वार्षिक वार्ता की गति थम सकती है, जिसकी आधिकारिक शुरुआत रविवार को हुई और वहां विश्व भर के देशों का प्रतिनिधित्व रहेगा, जिनमें समुद्र जल के बढ़ते स्तर, मरूस्थलीकरण व अन्य प्रभावों का सामना कर रहे गरीब देश भी शामिल हैं।

Advertisement
First Published - October 31, 2021 | 11:14 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement