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सुप्रीम कोर्ट की मेटा–व्हाट्सऐप को सख्त चेतावनी: भारतीय कानून नहीं माना तो कारोबार बंद करना होगा

मेटा और व्हाट्सऐप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि जुर्माने की राशि जमा कर दी गई है

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भाविनी मिश्रा   
Last Updated- February 03, 2026 | 11:12 PM IST

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को मेटा प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सऐप को दो टूक शब्दों में कह दिया कि अगर वे देश के कानून का पालन नहीं करेंगे तो उन्हें भारत में कारोबार भी नहीं करने दिया जाएगा। न्यायालय ने साफ तौर पर कह दिया कि जब तक व्हाट्सऐप की 2021 की गोपनीयता नीति पर लगाए गए जुर्माने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार कर रहा है तब तक भारतीयों की व्यक्तिगत जानकारियों के एक कतरे का भी बेजा इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान व्हाट्सऐप एवं उसकी मूल कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स से कहा,‘आप देश से बाहर निकल जाएं, यहां से अपनी सुविधाएं वापस ले लें। अगर आप इसी तरह बाजार में एकाधिकार जमात रहे तो उपभोक्ताओं के पास कोई विकल्प नहीं रह जाएगा।’

न्यायालय की यह टिप्पणी तब आई है जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली के पीठ ने मेटा प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सऐप एलएलसी द्वारा राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के उस फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई की जिसमें भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा लगाया गया 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना बरकरार रखा गया था।

सीसीआई ने एनसीएलएटी के उस फैसले के खिलाफ एक क्रॉस-अपील भी दायर की है जिसमें यह मानते हुए विज्ञापन साझा करने की इजाजत दी गई थी कि उस मोर्चे पर प्रभुत्व का कोई दुरुपयोग नहीं हुआ है।

मेटा और व्हाट्सऐप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अखिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि जुर्माने की राशि जमा कर दी गई है।

याचिकाओं पर उसकी ठोस बुनियाद के आधार पर सुनवाई करने पर सहमति जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने मेटा के निजता ढांचे पर तीखी आपत्ति जताई और संकेत दिया कि न्यायालय अंतरिम में जानकारियां साझा पर रोक लगा सकता है। जब उनके वकील ने कहा कि एनसीएलएटी ने इस पहलू पर उनके पक्ष में फैसला सुनाया था तो सीसीआई ने इस दावे का खंडन किया। उपयोगकर्ताओं के पास वास्तविक विकल्प होने के दावे पर सवाल उठाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मेटा एकाधिकार जमाने के लिए काम कर रही है।

मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, ‘क्या विकल्प है? बाजार में आपका पूरा एकाधिकार है और आप कह रहे हैं कि मैं एक विकल्प दे रहा हूं। या तो आप व्हाट्स्ऐप नीति से बाहर निकल जाएं या हम जानकारियां साझा करेंगे।’

मुख्य न्यायाधीश ने कहा,‘हम अपील पर योग्यता के आधार पर सुनवाई कर सकते हैं। इस बीच, हम आपको एक भी जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देंगे। अगर आप अपने प्रबंधन का एक हलफनामा एक वादे के साथ दे सकते हैं तो हम सुनेंगे अन्यथा हम खारिज कर देंगे। आपको फेसबुक ने खरीदा था, कल फेसबुक को कोई और खरीदेगा और आप डेटा इधर से उधर कर देंगे। आप इस देश की निजता के अधिकार से नहीं खेल सकते। आप इस देश के संविधानवाद का मखौल उड़ा रहे हैं।’

जब सिब्बल ने तर्क दिया कि उपयोगकर्ता की अनुमति लेकर ही जानकारियां साझा की जाती हैं और वे चाहे तो ऐसी इजाजत नहीं दे सकते हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दिया,‘जानकारी साझा करने की अनुमति नहीं देने (ऑप्ट-आउट) से आपका क्या मतलब है? यह सवाल करते हुए कि क्या साधारण उपयोगकर्ता भी नीति को समझ सकते हैं।’

उन्होंने कहा,‘सड़क पर फल बेचने वाली एक गरीब महिला क्या आपकी पॉलिसी की शर्तों को समझ पाएगी? क्या आप उस भाषा की कल्पना कर सकते हैं जिसका आप उपयोग करते हैं और बहुत चतुराई से तैयार करते हैं। साधारण लोग इसे बिल्कुल नहीं समझ पाएंगे। यह नीति आम उपयोगकर्ताओं के नजरिए से तैयार की जानी चाहिए। क्या साधारण एवं कम पढ़े-लिखे लोग आपकी शर्तें समझ पाएंगे? आपने लाखों लोगों की व्यक्तिगत जानकारियां एकत्र की होगी। यह निजी जानकारियां चोरी करने का एक सभ्य तरीका है। हम आपको ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे।’

First Published : February 3, 2026 | 10:44 PM IST