विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को संसद को बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ रहा है। सरकार ऊर्जा बाजारों के जोखिम, उपलब्धता और लागत को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन सोमवार को सुबह दोनों सदनों में दिए गए बयान में जयशंकर ने कहा, ‘हमारे लिए भारतीय उपभोक्ताओं के हित हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता में रहे हैं और आगे भी रहेंगे। मौजूदा अस्थिर हालात में जहां भी आवश्यक पड़ी, भारत ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कूटनीति का सहारा लिया है।’
विपक्षी सांसदों द्वारा पश्चिम एशिया में संघर्ष के भारत पर प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की मांग करते हुए नारेबाजी और विरोध प्रदर्शनों के बीच विदेश मंत्री ने बताया कि भारतीय नागरिकों की मदद के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं और कम से कम 67,000 घर लौट आए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने 28 फरवरी को भारतीय बंदरगाहों पर अपने तीन नौसैनिक जहाजों को डॉक करने के लिए भारत से अनुमति मांगी थी और अगले दिन 1 मार्च को मंजूरी दे दी गई थी। इनमें एक युद्धपोत अभी भी कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा है।
मंत्री ने कहा, ‘आईआरआईएस लावन वास्तव में 4 मार्च को कोच्चि में डॉक किया गया था। चालक दल वर्तमान में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में है।’ जयशंकर ने कहा, ‘हमारा मानना है कि यह सही काम था और ईरानी विदेश मंत्री ने भी इस मानवीय व्यवहार के लिए आभार व्यक्त किया है।’
मालूम हो कि तीन ईरानी युद्धपोतों में से आईआरआईएस डेना को 4 मार्च को श्रीलंका के तट से दूर एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टारपीडो से वार कर डूबो दिया था। यह युद्धपोत भारत द्वारा आयोजित नौसैनिक अभ्यास और अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में भाग लेने के बाद घर लौट रहा था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए थे। कांग्रेस सहित विपक्ष ने हिंद महासागर क्षेत्र में ईरानी युद्धपोत के डूबने के लिए सरकार की आलोचना की है।
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभाव से निपटने में ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार प्रवाह तथा खाड़ी देशों में रह रहे लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा समेत भारत के राष्ट्रीय हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।
विपक्ष के हंगामे के कारण लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए विपक्ष के नोटिस पर चर्चा नहीं कर सकी। मंत्री ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका-इजरायल एवं ईरान के बीच लड़ाई को समाप्त करने के लिए भारत ने बातचीत का रास्ता अपनाने और सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किए जाने की वकालत की है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ‘विदेश मंत्री का एकतरफा बयान कोई समाधान नहीं है। हमें सामूहिक रूप से राष्ट्र को विश्वास में लेने की जरूरत है।’