वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आज अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमीसन ग्रीर के साथ दो दिन तक चली व्यापार वार्ता पूरी की। दोनों पक्षों के बीच बातचीत में लंबित मुद्दों पर ज्यादा प्रगति नहीं हुई। नई दिल्ली में हुई बैठकों के बाद वाणिज्य मंत्रालय ने द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत चर्चा को आगे बढ़ाने की दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता को दोहराया। उनकी भाषा पिछले दौर की वार्ताओं के बाद जारी किए गए बयानों के समान थी, जिसमें लंबित मुद्दों पर प्रगति के बारे में बहुत कम संकेत मिले थे।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के मुख्य पहलुओं की व्यापक समीक्षा की जिसमें बेहतर बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन, गैर-शुल्क बाधाओं को कम करना और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार शामिल है।’
मंत्रालय ने कहा, ‘चर्चा का ध्यान अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने पर केंद्रित था जो आगे व्यापक द्विपक्षीय व्यापार करार की दिशा में महत्त्वपूर्ण साबित होगा। दोनों पक्षों ने एक ऐसे समझौते के प्रति अपने संकल्प की पुष्टि की जो संतुलित, व्यावसायिक रूप से सार्थक हो और दोनों देशों के व्यवसायों, किसानों, श्रमिकों और उपभोक्ताओं को ठोस लाभ पहुंचाए।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा ग्रीर की दो दिवसीय यात्रा की घोषणा करने के बाद इस बारे में उम्मीद बढ़ने लगी थीं कि दोनों पक्ष 24 जुलाई से पहले एक समझौते की घोषणा कर सकते हैं। इस तारीख तक अमेरिका का 10 फीसदी सार्वभौम शुल्क समाप्त होने वाला है और सेक्शन 301 के तहत प्रस्तावित शुल्क लागू हो सकता है। हालांकि ग्रीर की यात्रा से पहले गोयल ने स्पष्ट किया था कि वह 24 जुलाई की समय सीमा से चिंतित नहीं हैं। इससे जल्द अंतरिम समझौते की उम्मीद कम हो गई।
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ता के आसपास की तात्कालिकता काफी कम हो गई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘वास्तविकता यह है कि 20 फरवरी को अमेरिका की सर्वोच्च अदालत द्वारा जवाबी शुल्क को अमान्य करने के साथ ही द्विपक्षीय व्यापार करार में जल्दबाजी करने का औचित्य काफी हद तक समाप्त हो गया है।’