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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से खत्म हुई आर्थिक अनिश्चितता, श्रम-बहुल उद्योगों और विनिर्माण को मिलेगा नया अवसर

भारत और अमेरिका सोमवार को ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमत हुए, जिसके तहत अमेरिका शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा

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रुचिका चित्रवंशी   
Last Updated- February 03, 2026 | 10:38 PM IST

वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि भारत अमेरिका व्यापार समझौते से देश के आर्थिक माहौल में फैली अनिश्चितता काफी हद तक दूर हुई है और इससे भारत के श्रम बहुल उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र के लिए अधिक अवसर पैदा होने की संभावना है।

वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने कहा कि ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था से अनिश्चितता के काले बादल छंट गए हैं। उद्योग को अब खुश होना चाहिए और राहत की सांस लेनी चाहिए।’ फिक्की के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘यह अच्छा समझौता है और इससे निर्यातकों को लाभ होगा।’

भारत -अमेरिका व्यापार समझौते का हवाला देते हुए आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि अनिश्चितता कम हो गई है। उन्होंने कहा कि हालांकि बजट उस समय की स्थिति को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया था, सरकार को अब अधिक तेजी की उम्मीद है। उसी कार्यक्रम में बोलते हुए ठाकुर ने कहा, ‘इसके बावजूद बजट का गणित पारदर्शी है और हम सकल घरेलू उत्पाद से ऋण का लक्ष्य हासिल करने को प्रतिबद्ध हैं।’

राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने एक बयान में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता से दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार का विस्तार होगा। उन्होंने कहा, ‘इससे श्रम बहुल और विनिर्माण क्षेत्र के लिए अमेरिकी बाजार में अवसर पैदा होंगे और उन्नत तकनीक वाले क्षेत्रों में दोनों पक्षों के लिए आपस में लाभदायक सहयोग को गति मिलेगी।’

भारत और अमेरिका सोमवार को ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर सहमत हुए, जिसके तहत अमेरिका शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा।

भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर पर इस समझौते के असर के बारे में ठाकुर ने कहा, ‘अभी स्थिति साफ होने का इंतजार करेंगे। बहुत रचनात्मक बातचीत चल रही है, जिसकी वजह से यह प्रगति हुई है। हमें ब्योरे की प्रतीक्षा करना चाहिए।’ आर्थिक समीक्षा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बगैर वित्त वर्ष 2027 में 6.8 से 7.2 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

ठाकुर ने कहा, ‘हम सभी वैश्विक व्यवस्था के तहत काम करते हैं, जो एक दूसरे से जुड़ी है। इसमें भारत ऐसे देशों में है, जिसकी वृहद आर्थिक अवस्था मजबूत है। हम 10-12 साल पहले शुरू हुए रास्ते पर निरंतरता और प्रतिबद्धता के साथ आगे भी चलना जारी रखेंगे।’

डीईए सचिव ने यह भी कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में विनिवेश और संपत्ति बिक्री से संयुक्त रूप से 80,000 करोड़ रुपये से अधिक मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘इस लक्ष्य को अकेले एक चीज से हासिल नहीं किया जा सकता है। यह विनिवेश और संपत्ति मुद्रीकरण दोनों का मिश्रण है। हमें उम्मीद है कि हम लक्ष्य को पार कर लेंगे।’

ठाकुर ने कहा कि स्थिति को देखते हुए प्राप्तियों में तेजी की संभावना है। कार्यक्रम के दौरान डीएफएस सचिव ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र की ऋण वृद्धि 2047 के विकसित भारत का विजन पूरा करने के लिए अभी तक पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि बजट में बैंकिंग क्षेत्र के लिए विशेषज्ञों की प्रस्तावित उच्च स्तरीय समिति इस मुद्दे पर विचार करेगी और बैंकिंग क्षेत्र और ऋण वृद्धि में सुधार के लिए उपाय सुझाएगी। उन्होंने कहा, ‘सरकार जल्द ही समिति का गठन करेगी और उसके काम करने की शर्तें बताएगी।’

First Published : February 3, 2026 | 10:16 PM IST