प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले साल फरवरी में ‘दोनों पक्षों के लिए लाभदायक और बहु क्षेत्रीय’ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत करने की घोषणा की थी। उस समय प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी दौरे पर थे। पर्यवेक्षकों ने सोचा कि अन्य देशों की तुलना में पहले समझौता होने से अमेरिका के लगाए शुल्क से बचने के मामले में भारत को लाभ है।
लेकिन बातचीत ठहर गई। दोनों पक्ष बाजार पहुंच के मामले में टकरा गए। भारत राजनीतिक रूप से संवेदनशील डेरी और कृषि क्षेत्रों में छूट देने को इच्छुक नहीं था। भारत ने लचीला रुख दिखाने के लिए पिछले साल फरवरी में अमेरिका को कई छूट दी। इनमें हार्ली डेविडसन मोटरसाइकल पर आयात शुल्क में कमी करने से लेकर डिजिटल विज्ञापनों पर कथित रूप से गूगल टैक्स हटाने और बाद में कई गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों को वापस लेना शामिल था।
इसके बावजूद ट्रंप का रवैया अप्रत्याशित रहा। उन्होंने भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने का हवाला देते हुए पिछले साल 22 अगस्त से प्रभावी 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगा दिया, जिससे पहले से ही लगे 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क के साथ भारतीय आयात पर कुल शुल्क बढ़कर 50 प्रतिशत हो गया।
पिछले साल फरवरी के बाद मोदी और ट्रंप ने सीधे तौर पर मिलने से परहेज किया। इसकी वजह यह थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार पहलगाम आतंकी हमले के फलस्वरूप बढ़े तनाव के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु संघर्ष टालने का श्रेय लिया। सार्वजनिक रूप से ट्रंप कभी मोदी को ‘करीबी दोस्त’ कहते तो कभी भारत को ‘मृत अर्थव्यवस्था’ कहकर खारिज कर देते थे।
अमेरिकी अधिकारियों ने पूरे 2025 के दौरान ट्रंप की ही तरह कड़ा रुख अपनाए रखा। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भारत पर ‘रूसी युद्ध मशीन में तेल डालने’ का आरोप लगाया। वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने घोषणा की ‘हमें भारत को दुरुस्त करने की जरूरत है’।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने भारत को ‘अड़ियल’ बताया। व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने आरोप लगाया कि ‘भारतीय लोगों से ब्राह्मण मुनाफाखोरी कर रहे हैं’ और भारत को ‘टैरिफ का महाराजा’ करार दिया। हालांकि इस दौरान भारतीय अधिकारियों ने अपनी प्रतिक्रिया में संयम बनाए रखा और ज्यादातर उकसावों का कोई जवाब नहीं देने का विकल्प चुना।
अक्टूबर 2025 में भारत ने अमेरिका से अधिक ऊर्जा उत्पाद खरीदने और उसी महीने शुरू हुए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूस से तेल की खरीद कम करने के संकेत दिए। हालांकि इससे व्यापार समझौते की दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई।
भारत को उम्मीद थी कि कुल शुल्क घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया जाएगा। वहीं अमेरिका, भारत को अपने क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों पाकिस्तान (19 प्रतिशत), बांग्लादेश (20 प्रतिशत) और इंडोनेशिया (19 प्रतिशत) की तुलना में लाभ देने को लेकर इच्छुक नहीं था। इसकी वजह यह थी कि भारत ने बाजार को सीमिततौर पर उदार बनाने की पेशकश की थी।
बातचीत में निर्णायक मोड़ तब आया, जब सर्जियो गोर को भारत में अमेरिकी राजदूत नियुक्त किया गया। गोर लंबे समय तक ट्रंप के सहायक रह चुके हैं। गोर ने पहले व्हाइट हाउस के राष्ट्रपति कार्मिक कार्यालय के निदेशक के रूप में कार्य किया था, जहां वह पूरे प्रशासन में भर्ती का काम देखते थे।
राजदूत का पदभार संभालने के बाद अपने पहले सार्वजनिक बयान में गोर ने 12 जनवरी को कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना आसान काम नहीं है, लेकिन ‘हम उसे अंतिम रूप देने को लेकर अडिग हैं’। गोर ने कहा, ‘सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन अंत में हमेशा अपने मतभेद सुलझा लेते हैं।’
सबसे पहले गोर ने ही सोमवार की शाम को बड़ी सफलता का संकेत दिया था। उन्होंने ट्रंप और मोदी के बीच बातचीत के तुरंत बाद एक्स पर ‘स्टे ट्यून्ड’ लिखा। ट्रंप और मोदी की औपचारिक घोषणाओं के पहले ही इस पोस्ट ने गिफ्ट निफ्टी में तेजी ला दी। इस तरह से संबंधों के एक नए दौर की नींव पड़ी।