भाजपा की प्रचंड जीत के साथ पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) को लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से कदम बढ़ा सकती है। वर्ष 2018 में लॉन्च पीएमजेएवाई के तहत मरीज को अस्पताल में भर्ती होने पर प्रति परिवार 5 लाख रुपये का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा की सुविधा मिलती है। वर्तमान में पश्चिम बंगाल को छोड़कर 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह योजना लागू है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा संसद में एक प्रश्न के जवाब में दिए गए आंकड़ों के अनुसार इस योजना के विस्तार से राज्य में अनुमानित 1.24 करोड़ परिवारों के साथ-साथ 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 16 लाख वरिष्ठ नागरिकों को लाभ होगा।
इस कदम से पश्चिम बंगाल में वर्तमान में कार्यरत लगभग तीन लाख आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी लाभ हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में अपने विजयी भाषण के दौरान ही ऐलान कर दिया कि राज्य में पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत योजना को हरी झंडी दे दी जाएगी। पीएमजेएवाई को शुरुआत में पश्चिम बंगाल में भी लागू की गई थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार जनवरी 2019 में इससे पीछे हट गई।
ममता ने तर्क दिया कि इस योजना में कम से कम 40 प्रतिशत लागत राज्य सरकार वहन करेगी और इसका पूरा श्रेय केंद्र सरकार को मिलेगा। इसी साल 20 मार्च को संसद में एक प्रश्न के जवाब के अनुसार, ‘यह योजना पश्चिम बंगाल में केवल 23 सितंबर, 2018 से 10 जनवरी, 2019 तक लागू रही। इस दौरान राज्य को सालाना 785 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।’
लेकिन ममता बनर्जी ने राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित स्वास्थ्य साथी योजना लागू करने का फैसला किया। उसमें भी प्रति परिवार हर वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलता था।आयुष्मान योजना में पात्रता के लिए व्यक्ति को 2011 के सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के आधार पर विशिष्ट निम्न-आय या कमजोर श्रेणी में होना आवश्यक है, जबकि राज्य सरकार की स्वास्थ्य साथी योजना में ऐसी कोई शर्त नहीं है।
नतीजतन, स्वास्थ्य साथी डैशबोर्ड पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य की योजना पश्चिम बंगाल के 2,800 अस्पतालों में पीएमजेएवाई के तहत पात्र परिवारों की तुलना में अधिक कहीं अधिक 2.42 करोड़ परिवारों को कवर करती है। दूसरी ओर, पीएमजेएवाई में 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रति परिवार हर वर्ष 5 लाख रुपये का अतिरिक्त फायदा शामिल है, जो राज्य योजना में नहीं है, लेकिन उसमें पति-पत्नी दोनों के माता-पिता को एकल परिवार के तहत शामिल किया गया।
योजना के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने ‘बिज़नेस स्टैंडर्ड’ को बताया कि पश्चिम बंगाल में आयुष्मान योजना ओडिशा, महाराष्ट्र और पंजाब की तर्ज पर केंद्र एवं राज्य दोनों योजनाओं को मिलाकर लागू किया जा सकता है। एक सूत्र ने कहा, ‘आयुष्मान योजना ओडिशा की गोपबंधु जन आरोग्य योजना (जीजेएवाई) के साथ एकल कार्ड के माध्यम से चल रही है। इसमें प्रति परिवार सालाना 5 लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा का कवरेज मिलता है, जिसमें महिलाओं परिवार के सदस्यों के लिए अतिरिक्त 5 लाख रुपये शामिल हैं।’
राज्य उन लाभार्थियों को भी जोड़ सकते हैं, जिनकी पहचान केंद्र सरकार द्वारा की गई है। पश्चिम बंगाल के मामले में यह काफी फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि वहां राज्य की योजना के लाभार्थी केंद्रीय योजना के तहत लाभार्थियों से अधिक हैं।
उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना (एमजेपीजेवाई) के साथ एकीकृत योजना के रूप में आयुष्मान भारत योजना लागू है। एक अधिकारी ने बताया, ‘अतिरिक्त लाभार्थियों के लिए राज्य को पूरे प्रीमियम की लागत वहन करनी पड़ती है, लेकिन परिवार आयुष्मान भारत नेटवर्क के अस्पतालों का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें राज्य के बाहर के अस्पताल भी शामिल हैं।’