रिटायरमेंट की प्लानिंग अक्सर नौकरीपेशा लोगों की प्राथमिकता में सबसे आखिर में आती है। घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, होम लोन, गाड़ी की EMI और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच भविष्य के लिए बचत का फैसला टलता रहता है। ऐसे में जब लोग रिटायरमेंट की तैयारी शुरू करते हैं, तब तक काफी समय निकल चुका होता है।
यही वजह है कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी पेशन स्कीमस्स को लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा के लिए अहम माना जाता है। हालांकि, कंपनियों में कॉर्पोरेट NPS को लागू करने और कर्मचारियों को इससे जोड़ने की प्रक्रिया अब तक काफी मुश्किल मानी जाती रही है। लेकिन इस चुनौती को आसान बनाने के लिए पैसाबाजार के रिटायरमेंट प्लानिंग प्लेटफॉर्म ‘पेंशनबाजार’ ने अपनी कॉर्पोरेट NPS सर्विस को और मजबूत किया है। कंपनी का दावा है कि नए डिजिटल प्लेटफॉर्म से कंपनियों और कर्मचारियों, दोनों के लिए NPS से जुड़ना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा।
अब तक किसी भी कंपनी में कॉर्पोरेट NPS लागू करना HR और फाइनेंस टीमों के लिए आसान नहीं था। इसमें कागजी प्रक्रिया पूरी करना, कर्मचारियों का रिकॉर्ड संभालना और हर महीने होने वाले योगदान का हिसाब रखना काफी समय लेने वाला काम माना जाता था। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पेंशनबाजार ने एक ‘सिंगल-विंडो’ सॉल्यूशन तैयार किया है।
इस प्लेटफॉर्म की मदद से नए कर्मचारियों की डिजिटल ऑनबोर्डिंग, जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करना, हर महीने जमा होने वाले पैसे का रिकॉर्ड, रिपोर्ट तैयार करना और अकाउंट से जुड़ी सर्विसिंग जैसे सभी काम एक ही जगह से किए जा सकते हैं। डिजिटल ऑनबोर्डिंग के कारण कागजी प्रक्रिया काफी कम हो जाती है और मैन्युअल गलतियों की संभावना भी घटती है। यही वजह है कि छोटी कंपनियों से लेकर बड़े कॉरपोरेट हाउस तक अपनी टीमों के लिए इस सुविधा को आसानी से अपना पा रहे हैं।
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वहीं, कर्मचारियों के लिए भी यह प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी आसान हो गई है। वे अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए कुछ ही मिनटों में ऑनबोर्डिंग पूरी कर सकते हैं। इसके बाद एक ही डैशबोर्ड पर अपने रिटायरमेंट फंड, जमा राशि में बढ़ोतरी और खाते से जुड़ी दूसरी जरूरी जानकारी आसानी से देख और उसे मैनेज कर सकते हैं।
आज के समय में कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाएं सिर्फ मासिक वेतन या मेडिकल इंश्योरेंस तक सीमित नहीं हैं। कंपनियां अब अपने कर्मचारियों की आर्थिक सेहत यानी फाइनेंशियल वेलबीइंग पर भी पहले से ज्यादा ध्यान दे रही हैं। इसके बावजूद, ज्यादातर कर्मचारी नौकरी के शुरुआती दिनों में रिटायरमेंट प्लानिंग को ज्यादा महत्व नहीं देते। जब तक वे इसके बारे में गंभीरता से सोचना शुरू करते हैं, तब तक काफी समय बीत चुका होता है।
पेंशनबाजार इसी सोच को बदलने की कोशिश कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म आसान भाषा में सही जानकारी और बिना किसी झंझट के डिजिटल सुविधा के जरिए कर्मचारियों को कम उम्र से ही रिटायरमेंट की योजना शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। समय रहते निवेश शुरू करने से कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर मिलने वाले ब्याज का पूरा फायदा मिलता है, जिससे लंबे समय में बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करने में मदद मिलती है।
पेंशनबाजार के प्रमुख विश्वजीत गोयल का कहना है कि ज्यादातर लोग अपने करियर के आखिरी दौर में रिटायरमेंट की योजना बनाना शुरू करते हैं, जबकि कंपाउंडिंग का असली फायदा तभी मिलता है, जब निवेश की शुरुआत जल्दी की जाए। उनके मुताबिक, भारत में NPS रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए एक मजबूत व्यवस्था है, लेकिन इसे बड़े स्तर पर अपनाने के लिए जरूरी है कि कंपनियों और कर्मचारियों, दोनों के लिए इसकी प्रक्रिया आसान हो।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य इस प्रक्रिया से जुड़ी ऑपरेशनल चुनौतियों को कम करना और ऐसा अनुभव देना है, जिसे समझना आसान हो, जो सभी की पहुंच में हो और इस्तेमाल करने में भी सरल हो। साथ ही, वे चाहते हैं कि रिटायरमेंट प्लानिंग हर कर्मचारी की फाइनेंशियल प्लानिंग का स्वाभाविक हिस्सा बने और कंपनियों के लिए भी यह सुविधा अपने कर्मचारियों तक पहुंचाना आसान हो।
गोयल के मुताबिक, देश में जैसे-जैसे संगठित क्षेत्र में रोजगार बढ़ रहा है और लोग वित्तीय मामलों को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं, वैसे-वैसे कंपनियों के जरिए NPS जैसी स्कीम्स की अहमियत भी बढ़ेगी। उनका कहना है कि पेंशनबाजार की इस पहल से कंपनियों के लिए अपने कर्मचारियों को भविष्य की वित्तीय सुरक्षा से जोड़ना पहले के मुकाबले ज्यादा आसान हो जाएगा।