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एयरलाइनों के सुधार की राह प्रभावित

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Last Updated- December 11, 2022 | 6:10 PM IST

विमानन ईंधन तेल (एटीएफ) की तेजी से बढ़ती कीमतों, रुपये में गिरावट, आगामी कमजोर सीजन में घटती मांग और प्रतिस्पर्धी दबाव से सूचीबद्ध विमानन शेयरों इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और स्पाइसजेट के अल्पावधि परिदृश्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
दोनों एयरलाइनों के शेयर जून के शुरू से अब तक करीब 11 प्रतिशत गिर चुके हैं। विमानन क्षेत्र में कई तरह की समस्याओं को देखते हुए इन दो एयरलाइनों के लिए और गिरावट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चिंता हालांकि विमानन ईंधन की कीमतों में तेजी है और इसका 2021-22 में उनकी कुल लागत में करीब 40 प्रतिशत का योगदान रहा। गुरुवार को तेल विपणन कंपनियों ने कीमतों में अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तरों पर वृद्धि की घोषणा की। ये सरकारी करों के आधार पर 1.41 लाख रुपये प्रति किलोलीटर और 1.47 लाख प्रति किलोलीटर के बीच हैं।
एटीएफ कीमतें सालाना आधार पर 120 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 36 प्रतिशत बढ़ी हैं। एटीएफ कीमतों में उतार-चढ़ाव पर नजर रखे जाने की जरूरत होगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें शुक्रवार को मांग से संबंधित चिंताओं की वह से तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गई थीं। ब्याज दर वृद्धि की वजह से मांग को लेकर चिंता बढ़ गई है।
लागत वृद्धि का अन्य कारक डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव हो सकता है। पिछले सप्ताह रुपया गिरकर डॉलर के मुकाबले 78.22 के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था। भले ही रुपये में कुछ हद तक सुधार आया है, लेकिन यह तिमाही में 3.5 प्रतिशत नीचे रहा। एयरलाइनों की 70 प्रतिशत लागत डॉलर से संबंधित है और अमेरिकी मुद्रा में मजबूती आने से भारतीय विमानन कंपनियों को समस्या पैदा होगी।
स्पाइसजेट के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अजय सिंह का कहना है, ‘विमानन ईंधन कीमतों में भारी वृद्धि और रुपये में गिरावट से घरेलू एयरलाइनों के लिए तुरंत किराया बढ़ाने के अलावा अन्य कम संभावनाएं रह गई हैं। हमारा मानना है कि किराये में न्यूनतम 10-15 प्रतिशत की वृद्धि यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि परिचालन लागत बेहतर बनी रहे।’
जहां इंडिगो ने शुरू में संकेत दिया था कि मौजूदा किराये निर्धारित सीमा के मुकाबले काफी कम हैं और ज्यादा किराये से मांग अब तक प्रभावित नहीं हुई है, वहीं लागत वृद्धि से इस समीकरण में बदलाव आ सकता है।
जेएम फाइनैंशियल रिसर्च के आशुतोष सोमानी और हीत वोरा का कहना है, ‘बड़ी कीमत वृद्धि करने के बावजूद, एयरलाइनों को एटीएफ कीमतों में तेजी की भरपाई करने के लिए वृद्धि करने की जरूरत हो सकती है और संभवत: यात्रा उद्योग में मांग बढ़ाने पर जोर दिए जाने की आवश्यकता होगी।’
उनका कहना है कि कच्चे तेल में 5 प्रतिशत के उतार-चढ़ाव से किराया-पूर्व परिचालन मुनाफा 8.5 प्रतिशत तक प्रभावित होने का अनुमान है।
ऊंचे किराये को समर्थन मजबूत यात्रा रुझानों से मिल सकता है। औसत दैनिक यात्रियों की संख्या जून में 375,000 तक रही, जो मई के आंकड़ों के मुकाबले करीब 2 प्रतिशत अधिक है। दैनिक उड़ानों की संख्या भी समान मात्रा में बढ़ी है और लोड फैक्टर मजबूत बने हुए हैं। कई ब्रोकरों का मानना है कि मई और जून में कुल मासिक यात्री दर अब तक करीब 1.1-1.15 करोड़  (94 प्रतिशत) पर रही, जो महामारी-पूर्व स्तरों के आसपास है।
एयरलाइन कंपनियों के लिए उपयुक्त स्थिति है कीमत वृद्धि और लोड फैक्टर में सुधार लाना। हालांकि क्षमता वृद्धि और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से यात्री दर को ऊंचे स्तरों पर बनाए रखने पर ध्यान देना होगा।
इंडिगो ने वित्त वर्ष 2023 में उपलब्ध सीट प्रति मील/किलोमीटर में 55-60 प्रतिशत की वृद्धि का संकेत दिया है।
प्रतिस्पर्धी तीव्रता आकाश एयर और जेट एयरवेज के प्रवेश से बढ़ सकती है। हालात काफी हद तक उनके नजरिये और कीमत निर्धारण पर निर्भर करेंगे।
सेंट्रम ब्रोकिंग के आ​शिष शाह और वैभव शाह का कहना है, ‘पिछले दो साल के दौरान एयरलाइनों द्वारा दर्ज किए गए भारी नुकसान को देखते हुए, हमें इस उद्योग में मौजूदा कीमत निर्धारण अनुशासन बरकरार रहने का अनुमान है और सीजन में पड़ने वाले किसी तरह के प्रभाव की भरपाई होने की संभावना है। वहीं प्रतिस्पर्धी तीव्रता में बड़ी तेजी से यह अनुमान प्रभावित हो सकता है।’
बाजार की नजर इस क्षेत्र में विभिन्न उतार-चढ़ाव को देखते हुए प्रतिफल पर लगी रहेगी। आईसीआईसीआई सिक्यो. का मानना है कि प्रतिफल का अंदाजा वित्त वर्ष2023 की दूसरी तिमाही में लग पाएगा।  ऊंची लागत और प्रतिस्पर्धी गतिरोध को देखते हुए निवेशकों को फिलहाल इस सेक्टर से दूर बने रहना चाहिए।

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First Published - June 20, 2022 | 1:06 AM IST

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