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ऊंची कपास कीमतों से टेक्सटाइल उद्योग हो रहा है प्रभावित

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Last Updated- December 11, 2022 | 6:01 PM IST

बढ़ती माल ढुलाई लागत और ऊंची मुद्रास्फीति की दोहरी मार से कपास कीमतें कैलेंडर वर्ष 2022 में 35,829 रुपये से करीब 30 प्रतिशत बढ़कर 46,700 रुपये प्रति गांठ (प्रति गांठ में करीब 17 किलोग्राम) पर पहुंच गई हैं। विश्लेषकों के अनुसार, इससे घरेलू टेक्स्टाइल उद्योग के मार्जिन और बिक्री वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
इसके अलावा, बढ़ती ब्याज दरों से उपभोक्ताओं की खरीदारी क्षमता कमजोर हुई है, वहीं विश्लेषकों को अल्पावधि में इनके उत्पादों की मांग सुस्त रहने की आशंका सता रही है।
चीन के बाद भारत कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और कुल उत्पादन में उसका योगदान 25 प्रतिशत है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक मांग जिनजियांग क्षेत्र में उत्पादित कपास पर प्रतिबंध की वजह से चीन से स्थानांतरित हुई है।
वैश्विक आपूर्ति शृंखला रुझानों में बदलाव के साथ, इस जिंस की मांग बढ़ी है और यही वजह है कि इसकी कीमतों में तेजी आई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हालात के साथ साथ धागे और फैब्रिक कीमतों में तेजी से स्थानीय कताई मिलों में उत्पादन कमजोर हुआ है।
इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सभी दक्षिणी हिस्सों में 2,100 कताई मिलों में से करीब 10 प्रतिशत बंद हो गई हैं, क्योंकि वे स्वदेशी रूप से तैयार कपास में सक्षम नहीं हो सकतीं। रिपोर्टों के अनुसार, इसी तरह गुजरात और लुधियाना की कताई मिलें भी औसत तौर पर 50 प्रतिशत से कम की क्षमता पर परिचालन कर रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि कपास कीमतों में वृद्धि से वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही के दौरान छोटे आकार की धागा कताई मिलों पर प्रभाव बना रहेगा। हालांकि अच्छे मॉनसून के बाद कपास कीमतों में गिरावट वित्त वर्ष 2023 की दूसरी छमाही में कताई मिलों के लिए अलग कहानी तैयार कर सकती है।
जियोजित फाइनैंशियल सर्विसेज के प्रमुख (निवेश रणनीति) गौरांग शाह का कहना है, ‘ हमारा मानना है कि घरेलू कपास कीमतें अच्छे मॉनसून के बाद नीचे आएंगी। हालांकि अल्पावधि का समय कपास टेक्स्टाइल उद्योग के लिए अस्थिर रहने के आसार हैं।’
इसके अलावा, मॉनसून की धीमी शुरुआत से भी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इस सीजन में खरीफ फसलों के रकबे में 8 प्रतिशत की गिरावट को बढ़ावा मिला है। मॉनसून में विलंब की वजह से कम फसल पैदावार के अनुमान ने भारतीय कपास संघ को मौजूदा सत्र के लिए कपास फसल उत्पादन के लिए अपना अनुमान घटाकर 3.153 करोड़ गांठ करने के लिए बाध्य किया है, जो उसके पिछले अनुमान से 831,000 गांठ की कमी है।
आईडीबीआई कैपिटल के शोध प्रमुख ए के प्रभाकर का भी मानना है कि मजबूत कपास भंडारण वाली कंपनियां अच्छी स्थिति में रह सकती हैं। उनका कहना है, ‘टेक्स्टाइल कंपनियों में हमें केपीआर मिल (पूर्व में केपीआर कॉटन मिल्स) का प्रदर्शन अच्छा रहने की संभावना है, क्योंकि यह सही समय पर कपास खरीदने में सक्षम रही। हालांकि वेलस्पन का घाटा बढ़ सकता है।’
इस बीच, कैलेंडर वर्ष 2022 में कताई मिलों के शेयरों पर दबाव बना हुआ है।

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First Published - June 27, 2022 | 12:49 AM IST

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