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विदेश में भी चलेगा डिजिटल रुपया, सीमा-पार भुगतान के लिए पायलट प्रोजेक्ट लाएगा RBI

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आरबीआई साल 2026-27 में सीमा-पार डिजिटल रुपये के इस्तेमाल के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान और एसेट टोकनाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा

Last Updated- May 29, 2026 | 9:57 PM IST
Reserve bank of india (rbi)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को कहा कि वह 2026-27 में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सीमा-पार केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) पायलट के अवसर तलाशेगा। दरअसल रिजर्व बैंक डिजिटल भुगतानों, एसेट टोकनाइजेशन और प्रोग्रामेबल मनी के इस्तेमाल के तरीकों का विस्तार कर रहा है।

रिजर्व बैंक ने 2025-26 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि वह ‘चुनिंदा उपयोग-मामलों’ के साथ सीमा-पार सीबीडीसी पायलट को आगे बढ़ाएगा और सीमा-पार भुगतानों के लिए तकनीकी व शासन मानकों पर केंद्रित बहुपक्षीय परियोजनाओं में हिस्सा लेगा।

यह योजना ऐसे समय में आई है जब रिजर्व बैंक सीबीडीसी से जुड़ी भुगतान अवसंरचना पर विदेशी केंद्रीय बैंकों के साथ अपनी सहभागिता को मजबूत कर रहा है। 

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने मार्च में बताया था कि रिजर्व बैंक एशिया की अर्थव्यवस्थाओं और उन्नत यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं सहित चार से पांच देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ थोक व खुदरा भुगतानों के लिए सीमा-पार सीबीडीसी लेन देन के तरीके विकसित करने के लिए बातचीत कर रहा था।

रिजर्व बैंक ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि वह 2026-27 में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाओं और व्यावसायिक अनुप्रयोगों में अतिरिक्त उपयोग-मामलों को शामिल करने के लिए घरेलू सीबीडीसी पायलट का विस्तार भी करेगा। यह सीबीडीसी अवसंरचना के आसपास निर्मित उत्पादों और सेवाओं के परीक्षण के लिए अपनी सीबीडीसी व एसेट टोकनाइजेशन सैंडबॉक्स के तहत ढांचा पेश करने की योजना बना रहा है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह सीबीडीसी का उपयोग करके निपटान के साथ-साथ वित्तीय संपत्तियों के टोकनाइजेशन से जुड़े आगे की पायलट योजनाओं के अवसर तलाशेगा।

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First Published - May 29, 2026 | 9:46 PM IST

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