ब्लूमबर्ग इंडेक्स सर्विसेस लिमिटेड (बीआईएसएल) ने ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में पूर्ण सुगम मार्ग (एफएआर) के तहत भारत की सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल करने का मसला फिर टाल दिया है। बीआईएसएल ने आज कहा कि हाल में भारतीय बाजार में हुए सुधारों का असर रोजाना के कारोबार पर दिखने में अभी और वक्त लगेगा।
ब्लूमबर्ग इंडेक्स ने कहा, ‘बीआईएसएल को मिली जानकारियों के मुताबिक बाजार में दांव लगाने वाले कई लोग चाहते हैं कि ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल करने का निर्णय लेने से पहले ये सुधार बाजार में रोजाना के कारोबार पर असरदार ढंग से दिखना चाहिए।’
ब्लूमबर्ग इंडेक्स सर्विसेस अपने मुख्य ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में भारतीय एफएआर बॉन्ड शामिल करने की संभावना की समीक्षा कर रही है। यह सूचकांक वैश्विक निवेश स्तर के स्थिर आय बाजार के लिए एक अहम मानक है। इस साल जनवरी में संचालन और बाजार ढांचे से जुड़ी चिंता के कारण इसने निर्णय टाल दिया था।
भारत ने भी इनमें से कुछ चिंता दूर करने के लिए कई कदम उठाए हैं। जून में केंद्र सरकार ने घरेलू बॉन्ड बाजार मजबूत बनाने और विदेशी पूंजी खींचने के लिए योग्य विदेशी निवेशकों को कुछ खास सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर से छूट देने का ऐलान किया था।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी एफएआर का दायरा बढ़ा दिया है जिसमें 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की परिपक्वता अवधि सरकारी प्रतिभूतियों के सभी नए निर्गम शामिल हैं। आरबीआई ने विदेशी निवेशकों के लिए निवेश के नियम भी आसान बना दिए हैं।
कारोबारियों का कहना है कि सरकारी प्रतिभूतियां शामिल करने का फैसला टालने से मानक 10 वर्ष के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 4 से 5 आधार अंक तक बढ़ सकती है क्योंकि निवेशकों ने इसके शामिल होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए पहले ही कीमतें तय करनी शुरू कर दी थी। 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 6.83 फीसदी पर बंद हुई।
पीएनबी गिल्ट्स के वरिष्ट कार्याधिकारी उपाध्यक्ष विजय शर्मा ने कहा, ‘मानक 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड 4 से 5 आधार अंक तक बढ़ सकती है। बाजार को लग रहा था कि ये प्रतिभूतियां इस बार ब्लूमबर्ग ग्लोबल एग्रीगेट इंडेक्स में शामिल हो जाएंगी मगर ऐसा नहीं हुआ। इससे उन्हें थोड़ी निराशा हुई होगी। उनका कहना है कि बात आगे जरूर बढ़ी है मगर कुछ प्रयास और करने होंगे। वे यह नहीं कह रहे हैं कि भारत की सरकारी प्रतिभूतियां शामिल नहीं होंगी। भारत एक ऐसा बाजार है जिसे उन्हें आखिरकार शामिल करना ही होगा। मगर फिलहाल ऐसा लगता है कि इसे कम से कम जनवरी तक के लिए टाल दिया गया है।’
बीआईएसएल ने कहा कि बाजार में दांव खेलने वाले कारोबारियों एवं संस्थानों के साथ बातचीत से पता चला है कि विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार तक पहुंच बढ़ाने की बात मोटे तौर पर मान ली गई है। इसने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग की क्षमताएं लगातार बढ़ रही हैं और ऑटोमेटेड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म कई प्रमुख निवेशक क्षेत्रों में कामकाज को समर्थन कर रहे हैं।
ब्लूमबर्ग ने यह भी कहा कि सरकारी प्रतिभूतियों में योग्य विदेशी निवेशकों के लिए विदहोल्डिंग टैक्स और पूंजीगत लाभ कर हटाना एक बड़ा सुधार है क्योंकि इससे संचालन संबंधी जटिलता कम होती है और निपटान क्षमता भी मजबूत होती है।
हालांकि कारोबारियों एवं कारोबारी संस्थानों का कहना है कि संचालन दिक्कतें पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं। उनके अनुसार इलेक्ट्रॉनिक रूप में कारोबार करने का ढांचा लागू करने और विदेशी निवेशकों को साथ लाने को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
एक ट्रेडर ने कहा, ‘हम निश्चित परिपक्वता अवधि वाली प्रतिभूतियों की यील्ड 4 से 5 आधार अंक तक बढ़ सकती है। कुछ प्लेटफॉर्म पर सीसीआईएल के साथ जुड़ाव हुआ है। निवेशकों का कहना है कि उन्होंने उस प्लेटफॉर्म को परखा नहीं है और उन्हें ठीक से नहीं पता कि यह ठीक से काम करता है या नहीं। दूसरी बात, ऑनबोर्डिंग और केवाईसी प्रक्रिया को लेकर वे बहुत आश्वस्त नहीं हैं इसलिए निवेशकों ने कुछ समय मांगा है।’