राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने मंगलवार को अपना बॉन्ड निर्गम वापस ले लिया। निवेशकों द्वारा अधिक कटऑफ की मांग की गई, जिससे निर्गमकर्ता ने इसे वापस लेने का फैसला किया। बाजार हिस्सेदारों ने इश्यू के बड़े आकार को यील्ड में वृद्धि की वजह बताई। कंपनी 5 साल के बॉन्ड के माध्यम से 8,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही थी। बोली पुस्तिका के आंकड़ों से पता चला कि नीलामी अपने लक्ष्य से काफी कम रही। 7.20 प्रतिशत से 7.60 प्रतिशत तक के कूपन स्तरों पर इस इश्यू में 112 बोलियों के माध्यम से लगभग 7,166.5 करोड़ रुपये की बोलियां आईं और मूल्य निर्धारण बैंड से करीब 833 करोड़ रुपये कम आए।
बाजार प्रतिभागियों ने कहा कि नाबार्ड द्वारा पेश की गई कम कूपन दर पर मांग कमजोर थी और 7.43 प्रतिशत के स्तर तक बमुश्किल 1,126.5 करोड़ रुपये आए।
रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘बॉन्ड बाजार में तेज उतार-चढ़ाव को देखते हुए इसे वापस लेने का नाबार्ड का निर्णय व्यावसायिक रूप से विवेकपूर्ण प्रतीत होता है। पश्चिम एशियाई संकट बढ़ने के बीच बॉन्ड यील्ड में वृद्धि जारी रही और निवेशकों ने बड़े आवंटन के लिए अधिक यील्ड की मांग की, जिससे वांछित मूल्य निर्धारण पर पूर्ण कार्य निष्पादन मुश्किल हो गया।’
उन्होंने आगे कहा, ‘बाजार रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति से पहले सावधानी बरत रहा है, जिसमें नीतिगत टिप्पणी, नकदी को लेकर दृष्टिकोण और ब्याज दर की दिशा के बारे में अनिश्चितता शामिल है। वर्तमान माहौल में यील्ड की खोज लगभग हर दिन बदल रही है, द्वितीयक बाजार का स्तर अत्यधिक अस्थिर है और जारीकर्ताओं को निष्पादन जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। नीति के बाद और भू राजनीतिक अस्थिरता के कम होने तक इंतजार करने से जारीकर्ताओं को बेहतर मूल्य निर्धारण दृश्यता और कम वित्तपोषण लागत के साथ वापस आने की अनुमति मिलेगी।’
एक ब्रोकरेज फर्म के एक फिक्स्ड इनकम डीलर ने कहा कि उम्मीद से काफी अधिक स्तर आने के कारण निर्गम वापस ले लिया गया था। डीलर ने कहा, ‘यह स्तर केवल बड़े निर्गम आकार के कारण बढ़े।’ बॉन्ड बाजार सहभागियों को उम्मीद है कि जारीकर्ता बुधवार को रिजर्व बैंक के नीतिगत फैसले तक बड़े आकार के प्रस्तावों को टाले रखेंगे।