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Last Updated- December 11, 2022 | 6:26 PM IST

केंद्र सरकार विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसयू) में निजीकरण के लिए संस्थागत क्षमता निर्माण पर विचार कर रही है। इसका मकसद नई सार्वजनिक उद्यम (पीएसई) नीति, 2021 को गति देना है।
एक अधिकारी ने कहा कि निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) मंत्रालयों को विनिवेश संबंधी उपायों और विश्लेषण व निर्णय लेने की आंतरिक क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित कर रहा है। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब यह डर बना हुआ है कि निजीकरण के प्रस्ताव लाए जाने पर याचिकाएं हो जाती हैं और खासकर कर्मचारी व एक्टिविस्ट ऐसे तमाम फैसलों को न्यायालयों में चुनौती दे रहे हैं। हाल में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स और पवन हंस के निजीकरण को रोकना पड़ा क्योंकि बोली हासिल करने वालों के खिलाफ न्यायालय के विपरीत आदेश आए हैं। केंद्र सरकार निजीकरण की नीति पर आगे बढ़ने को इच्छुक है, विभागों में रणनीतिक बिक्री को लेकर डर खत्म किए जाने की जरूरत है। अधिकारी ने कहा कि दीपम परिणाम के बजाय उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दे रहा है।   
दीपम विभिन्न विभागों और मंत्रालयों को सुझाव दे सकता है कि वे सरकार की पीएसई नीति के तहत अपने पीएसयू के निजीकरण प्रस्तावों पर सक्रियता से काम करें। इसका मकसद रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार की उपस्थिति कम करना और गैर रणनीतिक क्षेत्र से पूरी तरह से बाहर निकलना है। दीपम ने विभागों और पीएसयू को सरकार की पीएसई नीति को समझने में मदद करने के लिए दस्तावेज तैयार किए हैं, जिससे सरकारी फर्मों और उनकी इकाइयों को बेचने में मदद मिल सके। इसमें प्रक्रिया व दिशानिर्देश शामिल हैं, जिसका हर कदम पर पालन करना होता है।
संस्थागत क्षमता विकसित करने के लिए सरकार के विभाग और पीएसयू को लेनदेन सलाहकार की नियुक्ति करनी होगी, जिससे रणनीतिक विनिवेश में उन्हें मदद मिल सके।
 

First Published - June 9, 2022 | 12:37 AM IST

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