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Nifty IT Crash: एक्सेंचर के झटके से बाजार में हाहाकार, निफ्टी IT इंडेक्स 2023 के बाद सबसे निचले स्तर पर

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एक्सेंचर द्वारा सालाना राजस्व अनुमान घटाने से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली हुई। निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 6.4% टूटकर अपने तीन साल के निचले स्तर पर पहुंच गया

Last Updated- June 19, 2026 | 10:14 PM IST
NSE
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

एनएसई पर दिन के कारोबार के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के शेयर दबाव में रहे और वे 9 प्रतिशत तक गिर गए। यह गिरावट तब आई जब एक्सेंचर ने तिमाही नतीजों के स्थिर रहने के बावजूद अपनी सालाना राजस्व वृद्धि का अनुमान घटा दिया और चौथी तिमाही के लिए उम्मीद से कमजोर अनुमान जारी किया।

घरेलू बाजारों में इन्फोसिस 9 प्रतिशत और एमफेसिस 8 प्रतिशत गिरे। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), टेक महिंद्रा और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयरों में 7-7 प्रतिशत की गिरावट आई। एचसीएल टेक्नॉलजीज, एलटीएम और कोफोर्ज के शेयर दिन के कारोबार में 6-6 प्रतिशत नीचे आ गए थे। टीसीएस, इन्फोसिस, एलटीएम और विप्रो के शेयर अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।

एनएसई पर दिन के कारोबार के दौरान निफ्टी आईटी इंडेक्स 6.4 प्रतिशत गिरकर 26,634.50 पर आ गया। आईटी सूचकांक 21 अप्रैल, 2023 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर था। निफ्टी 50 में 0.64 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले निफ्टी आईटी सूचकांक 3.6 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

एक्सेंचर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए स्थिर मुद्रा के आधार पर 1-5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया है और उसे वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में मुद्रा में उतार-चढ़ाव से 0.5 प्रतिशत की कमी की उम्मीद है। 

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए राजस्व वृद्धि का अनुमान स्थिर मुद्रा में सालाना 3-5 प्रतिशत से घटाकर 3-4 प्रतिशत कर दिया है। इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया संघर्ष और खास ग्राहकों से जुड़ी दिक्कतों के कारण दो बड़े सौदों का वित्त वर्ष 2027 में हाथ से चले जाना है।

वित्त वर्ष 2026 के लिए एक्सेंचर को मुद्रा में उतार-चढ़ाव से लगभग 2 प्रतिशत से ज्यादा का फायदा और अपने अमेरिकी व्यवसाय से 1 प्रतिशत का नुकसान होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2026 के लिए समायोजित एबिटा मार्जिन का अनुमान 15.8 प्रतिशत रहा, जबकि पहले यह अनुमान 15.7-15.9 प्रतिशत के दायरे में था।

तीसरी तिमाही की टिप्पणी से पता चलता है कि मांग का माहौल मिला-जुला है। एआई-आधारित बदलाव की मजबूत मांग है, लेकिन दूसरी ओर गैर-जरूरी खर्च कम हैं और फैसला लेने में ज्यादा समय लग रहा है। वित्त वर्ष 2026 के लिए प्रबंधन को कंसल्टिंग में कमजोर एक अंक और मैनेज्ड सर्विसेज में मध्यम एक अंक वृद्धि की उम्मीद है।

नोमूरा के विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया संघर्ष का असर भारतीय आईटी कंपनियों की वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही की कमाई और डील बुकिंग पर पड़ सकता है।

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First Published - June 19, 2026 | 10:11 PM IST

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