निजी क्षेत्र के भारत के सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक ने भूराजनीतिक अनिश्चितताओं को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 की वृद्धि को लेकर संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। बैंक ने ऋण वृद्धि को बैंकिंग क्षेत्र की ऋण वृद्धि से तेज रखने के अनुमान को कम कर दिया है। अब इसका लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 की वृद्धि दर को बनाए रखने का है, जो सालाना आधार पर 12 प्रतिशत थी। वित्त वर्ष 2025 में बैंक की ऋण वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत थी।
वित्त वर्ष 2026 में ऋण वृद्धि वित्त वर्ष 2025 की तुलना में बहुत अधिक थी, लेकिन यह बैंक के अनुमान से कम था। बैंक ने पहले अनुमान जताया था कि उसकी ऋण वृद्धि बैंकिंग व्यवस्था की ऋण वृद्धि से अधिक रहेगी। बैंक ने एचडीएफसी लिमिटेड के साथ विलय के बाद बढ़े ऋण जमा अनुपात (सीडी रेश्यो) को नीचे लाने के लिए वित्त वर्ष 2025 में ऋण वृद्धि कम रखी थी।
आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में बैंकिंग व्यवस्था की ऋण वृद्धि दर 16 प्रतिशत पहुंच गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह रिपोर्टिंग अवधि में बदलाव के कारण बढ़ा नजर आ रहा है।
वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के परिणाम की घोषणा के बाद विश्लेषकों से बात करते हुए एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन ने कहा, ‘यदि आप वित्त वर्ष 26 के अधिकांश हिस्से को देखें, तो नॉमिनल जीडीपी वृद्धि लगभग 9 से 9.5 प्रतिशत अपेक्षित थी। इसलिए, वर्ष के एक बड़े हिस्से तक आम सहमति यह थी कि व्यवस्था में ऋण वृद्धि लगभग 10.5 से 11.5 प्रतिशत होगी। यही हमने उम्मीद की थी और हमने अपनी रणनीतियों और अपनी वृद्धि को इसके अनुरूप बढ़ाया और हमारी वृद्धि दर 12 प्रतिशत रही।’
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में रिपोर्टेड सिस्टम ऋण वृद्धि 16 प्रतिशत रही है लेकिन वास्तविक वृद्धि लगभग 14 प्रतिशत सालाना है। उन्होंने कहा, ‘साफतौर पर यह तेज वृद्धि है। यह कुछ ऐसा है जिससे हमें निपटना होगा। लेकिन यह वित्त वर्ष 2025 के 5.4 प्रतिशत की वृद्धि और वित्त वर्ष 2026 की 12 प्रतिशत की वृद्धि की देखी गई गति से बहुत दूर नहीं है।’ उन्होंने कहा कि बैंक दायित्व के साथ वृद्धि बनाए रखने की स्थिति में है।