टाटा संस के चेयरमैन पद से एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे से कंपनी को सूचीबद्ध कराने की आवश्यकता पर कोई स्पष्टता आने की संभावना नहीं है। पंजीकरण रद्द करने संबंधी कंपनी के आवेदन पर अंतिम निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ही लेगा।
आरबीआई ने पिछले सप्ताह अपर लेयर एनबीएफसी की सूची की घोषणा करते हुए इस मामले पर यथास्थिति बनाए रखी। बैंकिंग नियामक ने एक बार फिर कहा कि पंजीकरण रद्द करने के टाटा संस के अनुरोध की जांच जारी है। टाटा संस चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपर लेयर एनबीएफसी की सूची में बनी रहेगी।
चंद्रशेखरन ने बोर्ड से समर्थन न मिलने को टाटा ट्रस्ट्स के साथ महीनों चले तनाव के बाद अपने इस निर्णय का मुख्य कारण बताया। टाटा संस को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराने के मुद्दे पर दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई थी। चंद्रशेखरन टाटा संस को सूचीबद्ध कराने के पक्ष में थे।
नियोस्ट्रैट एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक आबिजर दीवानजी ने कहा, ‘चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे का अपर लेयर एनबीएफसी के तौर पर टाटा संस के भविष्य पर संभवत: कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि अंतिम निर्णय आरबीआई को लेना है।’
चंद्रशेखरन ने कहा कि फरवरी 2027 में उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने पर वह टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एक अन्य कार्यकाल नहीं चाहेंगे। इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक और प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, ‘टाटा संस की सूचीबद्धता या गैर-सूचीबद्धता चंद्रशेखरन या बोर्ड के नियंत्रण में नहीं है क्योंकि इसके लिए बैंकिंग नियामक दबाव डाल रहा है। टाटा संस का आवेदन आरबीआई के पास लंबित है और उसने फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। यह मामला चंद्रशेखरन के नियंत्रण से बाहर है और इसलिए उन्हें पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।’
टाटा संस 2022 से ही आरबीआई की अपर लेयर एनबीएफसी सूची में एक मुख्य निवेश कंपनी (सीआईसी) के रूप में शामिल है। उस समय केंद्रीय बैंक ने एनबीएफसी के लिए स्केल आधारित नियामकीय ढांचा पेश किया था। वित्त वर्ष 2025 के लिए जनवरी 2025 में जारी पिछली सूची में भी कहा गया था कि पंजीकरण रद्द करने के टाटा संस के अनुरोध पर विचार किया जा रहा है। अपर लेयर एनबीएफसी को तीन साल के भीतर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होना आवश्यक है। मगर टाटा संस को सूचीबद्ध कराने की समय-सीमा सितंबर 2025 में ही खत्म हो चुकी है।
इस साल आरबीआई ने अपर लेयर एनबीएफसी के लिए मानदंडों में कुछ बदलाव किया है। इस साल जून से प्रभावी संशोधित नियमों के तहत कहा गया है कि 1 लाख करोड़ रुपये या इससे अधिक की परिसंपत्ति वाली एनबीएफसी ही अपर लेयर सूची में शामिल होने के लिए पात्र होंगी। इन संस्थाओं को बढ़ी हुई नियामक जरूरतों को पूरा करना होगा और उनके लिए तीन साल के भीतर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होना आवश्यक है। टाटा संस की एकल परिसंपत्ति 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
टाटा संस ने ऋण मुक्त होने के बाद अपना पंजीकरण रद्द करने की मांग के साथ 2024 में आरबीआई से संपर्क किया था। इससे वह एक गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी के तौर पर बरकरार रह सकती है। मगर सूचीबद्ध कराने की समय-सीमा खत्म होने के बाद भी टाटा संस का आवेदन आरबीआई के पास लंबित है।
दीवानजी ने कहा, ‘फिलहाल आरबीआई पंजीकरण रद्द करने संबंधी टाटा संस के आवेदन की जांच कर रहा है। उसे एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए या नहीं, इस मुद्दे पर आरबीआई का निर्णय ही उसकी स्थिति निर्धारित करेगा। सवाल अब भी बरकरार है कि क्या टाटा संस को एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।’
अगर आरबीआई पंजीकरण रद्द करने के अनुरोध को मंजूरी देता है तो अपर लेयर एनबीएफसी की आवश्यकताओं के अनुपालन का सवाल ही खत्म हो जाएगा जिसमें अनिवार्य सूचीबद्धता भी शामिल है। यदि आवेदन अस्वीकार कर दिया जाता है तो मौजूदा एनबीएफसी नियम लागू रहेंगे।