भारत का थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) फरवरी में 11 महीने के उच्च स्तर 2.13 प्रतिशत पर पहुंच गया जबकि यह जनवरी में 1.81 प्रतिशत था। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार थोक महंगाई में वृद्धि प्राथमिक वस्तुओं की बॉस्केट में खाद्य और अखाद्य वस्तुओं के दाम में बढ़ने के कारण हुआ।
थोक मूल्य आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई फरवरी में 12 महीने के उच्च स्तर 3.27 प्रतिशत पर पहुंच गई। इससे पहले प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई जनवरी 2025 में उच्चतम स्तर 4.58 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। केयर एज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने बताया, ‘प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई में वृद्धि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल और खनिज उत्पादों में विशेष रूप से तांबा, एल्युमीनियम, जस्ता और निकल जैसी बुनियादी धातुओं की दोहरे अंकों की महंगाई के कारण हुई।’
आंकड़ों से यह भी पता चला कि खाद्य महंगाई फरवरी में नौ महीनों के उच्चतम स्तर 1.85 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो जनवरी में 1.41 प्रतिशत थी। हालांकि ईंधन और बिजली क्षेत्र में जारी अपस्फीति ने विश्व खाद्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) महंगाई में समग्र वृद्धि को आंशिक रूप से संतुलित कर दिया।
यह वृद्धि खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि के बाद हुई है, जो 2024 के नए आधार वर्ष श्रृंखला के तहत फरवरी में 2.74 प्रतिशत से बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई। खाद्य महंगाई में वृद्धि और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के निरंतर दबाव के कारण खुदरा महंगाई बढ़ी, जबकि उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक फरवरी में 3.47 प्रतिशत पर आंका गया।
जनवरी में आठ महीने की गिरावट के बाद प्राथमिक खाद्य पदार्थों की महंगाई फरवरी में और बढ़कर 2.19 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 1.55 प्रतिशत थी। यह वृद्धि अनुकूल आधार प्रभाव के कमजोर पड़ने के कारण हुई। इस वृद्धि को फलों (3.57 प्रतिशत), दूध (3 प्रतिशत) और अंडे, मांस व मछली (5.36 प्रतिशत) जैसी प्रोटीन युक्त वस्तुओं की बढ़ती महंगाई के साथ-साथ धान (0.34 प्रतिशत) और सब्जियों (4.73 प्रतिशत) की कीमतों में वृद्धि से और बल मिला।