अर्थव्यवस्था

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता में तेजी, USTR प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में करेगा बाधाओं की समीक्षा

सितंबर में ही स्वित्जर की उप यूएसटीआर के रूप में पुष्टि की जा चुकी थी और भारत में यह उनकी पहली यात्रा होगी

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श्रेया नंदी   
Last Updated- December 05, 2025 | 9:55 PM IST

अमेरिका के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की अगले सप्ताह होने वाली भारत यात्रा का नेतृत्व उप अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) रिक स्वित्जर करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत कैलेंडर वर्ष के अंत से पहले व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने का लक्ष्य बना रहा है। इस मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता वार्ता के सहायक यूएसटीआर और मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच समझौते का जायजा लेने के लिए नई दिल्ली आने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे जिसमें अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी होंगे।

सितंबर में ही स्वित्जर की उप यूएसटीआर के रूप में पुष्टि की जा चुकी थी और भारत में यह उनकी पहली यात्रा होगी। अपनी इस नियुक्ति से पहले, स्वित्जर प्रोजेक्स टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग  के संस्थापक थे। अपने 20 वर्षों के विदेशी सेवा करियर में, उन्होंने अमेरिकी विदेश विभाग में अर्थव्यवस्था से जुड़े पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले विजिटिंग प्रोफेसर की भूमिका निभाने के साथ ही विदेश नीति योजना परिषद के सदस्य के रूप में भी काम किया।

यूएसटीआर अधिकारियों की बैठक वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और भारतीय पक्ष के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन सहित वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ होने की उम्मीद है। हालांकि, बिज़नेस स्टैंडर्ड को सूत्रों ने बताया कि यह बैठक वार्ता का नया चरण नहीं होगा बल्कि यह स्पष्ट करने का प्रयास होगा कि समझौते को अंतिम रूप देने में क्या बाधा आ रही है।

मार्च में वार्ता शुरू हुई थी और अब तक लगभग छह दौर की वार्ता हो चुकी है, जिसमें अंतिम अनौपचारिक चरण की वार्ता वॉशिंगटन में 15-17 अक्टूबर को हुई थी। पिछले सप्ताह, अग्रवाल ने कहा था कि भारत को इस साल के अंत तक अमेरिका के साथ ‘व्यापार समझौते के प्रारूप’ को अंतिम रूप देने की उम्मीद है,जिसमें भारतीय निर्यात पर लगाए गए बराबरी के शुल्क के मुद्दे पर कोई समाधान निकल सकता है।

अग्रवाल ने कहा, ‘यह निर्णय तो होना ही है, अब बस थोड़ा समय लगेगा। लेकिन यह निर्णय कई स्तरों पर विचार-विमर्श और मंजूरी के बाद ही लिया जा सकेगा। बहुत कम मुद्दे हैं और उनमें से कुछ पर राजनीतिक निर्णय लेने की आवश्यकता है।’

अमेरिका के साथ बातचीत दो समानांतर तरीके से चल रही है जिसमें एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौता है जिसमें अधिक समय लगेगा, और एक फ्रेमवर्क समझौता है जिसमें निर्यातकों पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क के बोझ को कम करने की बात है।

First Published : December 5, 2025 | 9:48 PM IST