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Middle East Crisis: पश्चिम एशिया के बिगड़े हालात से भारत को सता रही है व्यापार व सप्लाई चेन की चिंता

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। व्यापारिक रास्ते बंद होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें और महंगाई बढ़ने का बड़ा खतरा है

Last Updated- March 01, 2026 | 4:16 PM IST
Trade
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अचानक बिगड़े हालातों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजराजल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पूरा इलाका युद्ध की आग में झुलस रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है।

शिपिंग रूट्स पर खतरा

वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Department) के बड़े अधिकारियों के मुताबिक, सरकार की सबसे बड़ी फिक्र ग्लोबल शिपिंग रूट्स (समुद्री व्यापारिक रास्ते) को लेकर है। चूंकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए UAE, बहरीन, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देशों पर हमले किए हैं, ऐसे में समुद्र के रास्ते होने वाला व्यापार ठप पड़ सकता है।

सरकार का एक्शन प्लान

  • लगातार निगरानी: सरकार पल-पल की स्थिति पर नजर रख रही है कि युद्ध का दायरा कितना बढ़ता है।
  • विकल्पों की तलाश: अधिकारी यह देख रहे हैं कि अगर पुराने व्यापारिक रास्तों में रुकावट आती है, तो माल भेजने या मंगाने के लिए कौन से दूसरे रास्ते सुरक्षित हो सकते हैं।
  • सप्लाई चेन पर नजर: कोशिश यह है कि इस तनाव का असर भारत की जरूरी चीजों की सप्लाई और निर्यात (Export) पर कम से कम पड़े।

फिलहाल हालात काफी नाजुक बने हुए हैं और आने वाले कुछ दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के व्यापारिक हितों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

Also Read: होर्मुज स्ट्रेट हुआ बंद: ईरान के इस कदम से क्या भारत में पेट्रोल-डीजल के लिए मचेगा हाहाकार?

निर्यातकों की बढ़ी परेशानी

ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले निर्यातकों का कहना है कि मुश्किलें शुरू हो चुकी हैं। अगर युद्ध और फैला तो सिर्फ खाड़ी देश ही नहीं, बल्कि यूरोप और अमेरिका के साथ होने वाला व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित होगा।

  • लंबा और महंगा रास्ता: खाड़ी के रास्तों में तनाव की वजह से जहाजों को अफ्रीका के नीचे ‘केप ऑफ गुड होप’ वाले लंबे रास्ते से जाना पड़ सकता है।
  • दोहरी मार: इससे माल पहुंचने में समय ज्यादा लगेगा और जहाजों का किराया (Freight Cost) भी बहुत बढ़ जाएगा। निर्यातक पहले से ही अमेरिका की सख्त नीतियों और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता से परेशान हैं, अब इस संकट ने उनकी चिंता दोगुनी कर दी है।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह इलाका?

आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत का एक बड़ा कारोबार इन 13 देशों (खाड़ी देशों समेत ईरान, इराक, इजरायल आदि) पर टिका है:

  • निर्यात (Export): अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत ने यहाँ करीब 50 बिलियन डॉलर का सामान भेजा, जो हमारे कुल निर्यात का 15% है।
  • आयात (Import): इसी दौरान हमने वहां से 116.45 बिलियन डॉलर का सामान (मुख्यतः तेल और गैस) मंगाया, जो हमारी कुल जरूरतों का पांचवां हिस्सा है।
  • प्रमुख सामान: भारत यहां से इंजीनियरिंग सामान, खाने-पीने की चीजें, कपड़े और दवाइयां बड़े पैमाने पर भेजता है।

एक्सपर्टस् का क्या है कहना?

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के मुताबिक, फिलहाल निर्यात पूरी तरह ठप तो नहीं होगा, लेकिन जोखिम बहुत बढ़ गया है। अगर तनाव लंबा खिंचा, तो माल भेजने की लागत बढ़ेगी और डिलीवरी में देरी होगी।

वहीं, ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने चेतावनी दी है कि यह संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। उनका मानना है कि अगर युद्ध बढ़ा तो:

  1. ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतें बढ़ेंगी जिससे महंगाई बढ़ सकती है।
  2. सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा (Twin Deficit)।
  3. विदेशों से आने वाले पैसे (Remittance) पर भी असर पड़ सकता है।

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First Published - March 1, 2026 | 4:09 PM IST

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