पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अचानक बिगड़े हालातों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजराजल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और वहां के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पूरा इलाका युद्ध की आग में झुलस रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है।
वाणिज्य मंत्रालय (Commerce Department) के बड़े अधिकारियों के मुताबिक, सरकार की सबसे बड़ी फिक्र ग्लोबल शिपिंग रूट्स (समुद्री व्यापारिक रास्ते) को लेकर है। चूंकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए UAE, बहरीन, कुवैत और कतर जैसे खाड़ी देशों पर हमले किए हैं, ऐसे में समुद्र के रास्ते होने वाला व्यापार ठप पड़ सकता है।
फिलहाल हालात काफी नाजुक बने हुए हैं और आने वाले कुछ दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के व्यापारिक हितों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
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ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले निर्यातकों का कहना है कि मुश्किलें शुरू हो चुकी हैं। अगर युद्ध और फैला तो सिर्फ खाड़ी देश ही नहीं, बल्कि यूरोप और अमेरिका के साथ होने वाला व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित होगा।
आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत का एक बड़ा कारोबार इन 13 देशों (खाड़ी देशों समेत ईरान, इराक, इजरायल आदि) पर टिका है:
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के मुताबिक, फिलहाल निर्यात पूरी तरह ठप तो नहीं होगा, लेकिन जोखिम बहुत बढ़ गया है। अगर तनाव लंबा खिंचा, तो माल भेजने की लागत बढ़ेगी और डिलीवरी में देरी होगी।
वहीं, ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने चेतावनी दी है कि यह संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है। उनका मानना है कि अगर युद्ध बढ़ा तो: