देश में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां पिछले महीने जून में नरम पड़ीं। हालांकि अनुकूल मांग स्थिति के बीच नए ऑर्डर में उल्लेखनीय तेजी के साथ उत्पादन के स्तर पर वृद्धि बरकरार है। मौसमी रूप से समायोजित S&P ग्लोबल इंडिया का विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (PMI) घटकर जून महीने में 57.8 रहा जो मई महीने में 58.7 था। इससे पिछले महीने मई में यह 31 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
सर्वे में कहा गया है कि विनिर्माण गतिविधियों में नरमी के बावजूद आंकड़ा परिचालन स्थिति में सुधार को बताता है। मजबूत मांग ने बिक्री, उत्पादन, भंडार निर्माण और रोजगार जैसे अन्य क्षेत्रों को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। जून का PMI आंकड़ा लगातार 24वें महीने समग्र परिचालन स्थितियों में सुधार को बताता है।
PMI की भाषा में 50 से ऊपर अंक का मतलब विस्तार होता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर संकुचन को दर्शाता है। S&P ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस की एसोसिएट निदेशक पोलियाना डी लीमा ने कहा, ‘जून के जो PMI आंकड़े हैं, वह फिर से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत में विनिर्मित उत्पादों की मजबूत मांग को बताते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘ग्राहकों में सकारात्मक रूचि के साथ विनिर्माण उद्योग को समर्थन मिलता रहा। इससे उत्पादन, रोजगार, खरीद की मात्रा और कच्चे माल भंडार में वृद्धि हुई।’ मांग में तेजी, नए ग्राहकों की तरफ से पूछताछ और विपणन प्रयास वृद्धि की संभावनाओं को बताते हैं।
सर्वे के अनुसार व्यापार भरोसे का समग्र स्तर छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। रोजगार के मोर्चे पर वस्तु उत्पादकों ने जून में अतिरिक्त श्रमिकों को लेकर क्षमता विस्तार पर जोर दिया। रोजगार मध्यम गति से बढ़ा जो मोटे तौर पर मई के बराबर है। वस्तु उत्पादकों ने अतिरिक्त कच्चे माल की खरीद की। यह पिछले 12 साल में दूसरा मौका है जब सकारात्मक मांग रुख और बढ़ती उत्पादन जरूरतों के कारण अतिरिक्त कच्चे माल की खरीद में वृद्धि दर्ज की गयी है।
लीमा ने कहा, ‘कच्चे माल खरीद में वृद्धि विनिर्माताओं के बीच उम्मीद और सकारात्मक रुख को बताती है। वास्तव में उन्होंने अनुकूल बाजार स्थितियों को भुनाने और उत्पादन वृद्धि को समर्थन देने के लिये संसाधन हासिल किए। S&P ग्लोबल इंडिया विनिर्माण PMI लगभग 400 विनिर्माताओं के एक पैनल में खरीद प्रबंधकों को भेजे गए प्रश्नों के जवाबों के आधार पर S&P ग्लोबल तैयार करता है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत खरीद प्रबंधकों को शामिल किया जाता है।