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निजी क्षेत्र पर ‘युद्ध’ की मार: 3 साल के निचले स्तर पर पहुंची भारत की विकास दर, ऊर्जा संकट ने बढ़ाई मुसीबत

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ईरान युद्ध और ऊर्जा संकट के कारण मार्च में भारत के निजी क्षेत्र की वृद्धि दर तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है

Last Updated- March 24, 2026 | 10:51 PM IST
Growth
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारत के निजी क्षेत्र की वृद्धि मार्च में तीन साल से अधिक के सबसे निचले स्तर पर रहने की उम्मीद है। निजी सर्वेक्षण कंपनी ने मंगलवार को बताया कि दरअसल, ईरान युद्ध के कारण बाजार बाधित हुआ और ऊर्जा संकट के कारण घरेलू मांग में गिरावट आई व लागत बढ़ गई है। 

एसऐंडपी ग्लोबल द्वारा संकलित एचएसबीसी का फ्लैश इंडिया कम्पोजिट परचेजिंग मैनेजर्स आउटपुट (पीएमाई) सूचकांक  मार्च में गिरकर 56.5 पर आ गया और यह फरवरी के अंतिम आंकड़े 58.9 से कम है। दरअसल, मार्च का आंकड़ा अक्टूबर, 2022 के बाद सबसे कम है।

 यह आंकड़ा मार्च, 2022 में 55.5 था। यह सूचकांक लगातार 56 महीनों तक 50 से ऊपर रहा, जो वृद्धि और संकुचन को अलग करता है। फ्लैश पीएमआई किसी महीने के अंतिम विनिर्माण, सेवा व समग्र पीएमआई आंकड़ों का अग्रिम संकेत होता है।  यह आमतौर पर अंतिम पीएमआई सूचकांक जारी होने से एक सप्ताह पहले जारी किया जाता है। 

फ्लैश पीएमआई आमतौर पर प्रत्येक माह प्राप्त कुल पीएमआई सर्वेक्षण प्रतिक्रियाओं के लगभग 90 प्रतिशत पर आधारित होता है, और अंतिम रिपोर्ट में सभी प्रतिक्रियाओं का उपयोग किया  जाता है। एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘ऊर्जा संकट के कारण विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि धीमी हो गई। 

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First Published - March 24, 2026 | 10:47 PM IST

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