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बंगाल में भाजपा की जीत से खुलेगा विकास का द्वार: मनरेगा से लेकर आयुष्मान भारत तक, अब नहीं रुकेंगे फंड!

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भाजपा की जीत से बंगाल में वर्षों से रुकी केंद्रीय योजनाएं फिर शुरू होंगी। 'वीबी-जी राम जी' (नया मनरेगा) और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं से जनता को सीधा लाभ मिलेगा

Last Updated- May 04, 2026 | 11:15 PM IST
bjp west bengal win
जीत के बाद कार्यकर्ताओं का अभिनंदन स्वीकार करते पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की शानदार जीत के साथ पश्चिम बंगाल में कई केंद्रीय योजनाओं और परियोजनाओं के लिए धन मिलने का रास्ता आसान हो जाएगा। टिप्पणीकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के बीच टकराव के कारण अनेक योजनाएं अटकी हुई थीं। इसका प्रमुख उदाहरण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) है, जिसे अब वीबी-जी राम जी के रूप में नए सिरे से लाया गया है।

उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद केंद्र सरकार ने 6 दिसंबर, 2025 को एक आदेश जारी कर पश्चिम बंगाल में वीबी-जी राम जी योजना को कई शर्तों के साथ नए सिरे से शुरू करने की मंजूरी दी थी।

केंद्रीय सूत्रों के अनुसार, इन शर्तों में 20 लाख रुपये से अधिक के किसी भी कार्य पर रोक, सभी श्रमिकों के लिए 100% इलेक्ट्रॉनिक केवाई अनिवार्य होना, सभी कार्यों के शुरू होने से पहले संबंधित क्षेत्र का दौरा और राज्य में योजना के दोबारा शुरू होने के एक महीने के भीतर जॉब कार्ड की समीक्षा करना शामिल है। ये कदम राज्य में योजना के प्रभावी और कानूनी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए थे।

इसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह सशक्त समिति को मनरेगा के लिए 30 दिनों के भीतर 2025-26 के श्रम बजट का प्रस्ताव प्रस्तुत करे। लेकिन 2 फरवरी, 2026 को संसद में दिए गए एक जवाब के अनुसार राज्य सरकार ने उस समय श्रम बजट नहीं भेजा।

केंद्र सरकार ने कहा कि उसकी वेबसाइट के अनुसार, 8 मार्च, 2022 तक पश्चिम बंगाल से संबंधित कुल बकाया देनदारी 3082.52 करोड़ रुपये थी, जिसे केंद्र द्वारा सत्यापन के बाद स्वीकार किया जाना था। केंद्र ने नई मनरेगा या वीबी-जी राम जी अधिनियम की धारा 27 का इस्तेमाल करते हुए योजना को लागू करने में नियमों के उल्लंघन के कारण धन रोक दिया। पश्चिम बंगाल के लिए केंद्र की ओर से मार्च 2022 से धन जारी नहीं किया गया, क्योंकि राज्य में इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप लगाए गए थे। इसमें बड़ी संख्या में फर्जी लाभार्थी होने के भी आरोप थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मनरेगा या उसका नया अवतार वीबी-जी राम जी पश्चिम बंगाल में दोबारा सही तरीके से लागू हुई तो अन्य कई केंद्रीय योजनाओं का कार्यान्वयन भी आसान हो जाएगा। ऐसी ही एक योजना प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण अथवा ग्रामीण आवास योजना है। हालांकि, पश्चिम बंगाल में इस योजना को लागू करने की दर लगभग 75% रही, लेकिन यहां योजना के लिए अपात्र परिवारों के चयन, योग्य लाभार्थियों को वंचित करना और नियमों का उल्लंघन कर योजना का नाम बदलना जैसी अनेक शिकायतें मिलीं, जिनकी समय-समय पर केंद्रीय एजेंसियों द्वारा जांच की गई।

इसी तरह जल जीवन मिशन (जेजेएम) में 15 दिसंबर, 2025 तक पश्चिम बंगाल में 1.75 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 99.09 लाख यानी लगभग 56.46% को नल जल कनेक्शन प्रदान किए गए। 18 दिसंबर, 2025 को संसद में एक प्रश्न के जवाब के अनुसार 2019-20 और 2023-24 के बीच केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए पश्चिम बंगाल को लगभग 24,645 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन राज्य में लगभग 13,027.84 करोड़ रुपये यानी लगभग 53% ही उपयोग में लाए गए। राज्य में जेजेएम को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया गया है।

इतना ही नहीं, राज्य की अपनी स्वास्थ्य बीमा के अलावा जब केंद्र सरकार ने सितंबर 2018 में पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लागू की तो उसके बाद से हर साल 785 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, लेकिन यह योजना पश्चिम बंगाल में केवल 23 सितंबर 2018 से 10 जनवरी 2019 तक ही लागू की गई। इस दौरान राज्य को केंद्रीय हिस्से के रूप में 31.28 करोड़ रुपये जारी किए गए। संसद में दिए गए प्रश्न के जवाब के अनुसार बंगाल सरकार ने 10 जनवरी 2019 के बाद इस योजना से हटने का ऐलान कर दिया।

हालांकि पीएम-किसान योजना फरवरी 2019 में आधिकारिक तौर पर लॉन्च की गई थी, पश्चिम बंगाल वित्त वर्ष 22 में ही इसमें शामिल हुआ। अगस्त 2025 से नवंबर 2025 तक जारी 21वीं किस्त के लिए राज्य के लगभग 45 लाख पात्र किसानों को पीएम-किसान सहायता के रूप में लगभग 890 करोड़ रुपये दिए गए।

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First Published - May 4, 2026 | 11:06 PM IST

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