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सरकार की बढ़ेगी मुश्किल: पश्चिम एशिया संकट से उर्वरक सब्सिडी ₹1.71 लाख करोड़ के बजट के पार संभव

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पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरकों की बढ़ती वैश्विक कीमतों के चलते इस साल सरकारी सब्सिडी का बोझ बजट अनुमान 1.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक रह सकता है

Last Updated- May 04, 2026 | 10:14 PM IST
Fertilizer
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण आयातित यूरिया और अन्य उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के बीच वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च 1.71 लाख करोड़ रुपये के बजट आवंटन से अधिक होने का अनुमान है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उर्वरक विभाग में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर एक अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हम जानते हैं कि कीमतें बढ़ी हैं। यूरिया और अन्य उर्वरकों दोनों की कीमतों में बढ़ोतरी का रुझान दिख रहा है। निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी, लेकिन अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।’

शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के बावजूद खरीफ 2026 सत्र में उर्वरकों की उपलब्धता ‘अच्छी’ और ‘स्थिर’ बनी हुई है। मार्च-अप्रैल के लिए घरेलू उत्पादन 67.76 लाख टन रहा। इसमें यूरिया (40.72 लाख टन), डाई अमोनियम फॉस्फेट (5.39 लाख टन), एनपीके (13.65 लाख टन) और एसएसपी (8 लाख टन) शामिल हैं। इसके अलावा 17 लाख टन का आयात भी किया गया। यह आयात बंदरगाह और विदेश मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों से संभव हो पाया। विभाग ने मई के लिए 22 लाख टन यूरिया, 4 लाख टन डीएपी और 8 लाख टन एनपीके के घरेलू उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने बताया कि यूरिया के कुछ ऐसे संयंत्र जो अस्थायी रूप से बंद हो गए थे, वे अब फिर से चालू होने वाले हैं। उनके लिए गैस की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। यूरिया के आयात के लिए एक वैश्विक निविदा की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और मई-जून तक इसकी आपूर्ति होने की उम्मीद है। उर्वरकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 19 लाख टन एनपीके उर्वरकों के आयात हेतु एक अलग वैश्विक निविदा भी जारी किया गया है।

कृषि विभाग ने खरीफ 2026 सत्र के लिए उर्वरकों की आवश्यकता 390.54 लाख टन रहने का अनुमान जताया है। इसके मुकाबले, राज्यों ने पहले ही 195.71 लाख टन उर्वरक का स्टॉक जमा कर लिया है। यह कुल आवश्यकता का लगभग 50 प्रतिशत है। अधिकारियों के अनुसार यह ‘बेहतर योजना और समय से पहले स्टॉक जमा करने’ की रणनीति को बताता है।

कृषि मंत्रालय के आकलन के आधार पर राज्यों के हिसाब से मांग का खाका तैयार कर लिया गया है और इसके लिए स्टॉक जमा करने तथा अग्रिम योजना बनाने का काम पहले ही पूरा कर लिया गया है। केंद्रीय स्तर पर स्टॉक जमा करने के अलावा, जिलों के भीतर इसके पुनर्वितरण की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की ही रहेगी।  शर्मा ने कहा, ‘हम राज्यों के साथ नियमित बैठकें कर रहे हैं। जैसे-जैसे मौसम नजदीक आएगा, पुनर्वितरण से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए एक चौबीस घंटे संचालित होने वाला आपातकालीन प्रकोष्ठ स्थापित किया जाएगा।’

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First Published - May 4, 2026 | 10:10 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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