अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए नेतृत्व से स्पष्टता की उम्मीद कर रहे निवेशकों को निराशा हुई। उन्होंने आगाह किया कि ब्याज दरों की आगे की राह पर केंद्रीय बैंक के मिले-जुले संदेशों से शेयरों और बॉन्ड बाजार में अस्थिरता पैदा हो सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम बढ़ सकता है।
फेड ने ब्याज दरों को 3.50 फीसदी से 3.75 फीसदी के लक्षित दायरे में बिना किसी बदलाव के बरकरार रखा। 12 सदस्यों वाले पैनल में तीन लोगों ने इस फैसले का विरोध किया, जिससे विश्लेषकों ने इसे दरें बरकरार रखते हुए आक्रामक रुख बताया है। लिहाजा, भविष्य में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को फेड का नया चेयरमैन बनाया है और वार्श ने आगे के अनुमान के जरिए जरिये निवेशकों को साथ लिए चलने की परंपरा को छोड़ दिया है। इससे बाजार नए दौर में आ गया है। निवेशक अब फेड के अगले कदम के संकेत के लिए आर्थिक आंकड़ों को खंगाल रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि इस स्थिति से बाजार में तेजी से उतार-चढ़ाव हो सकता है।
डॉयचे बैंक के अनुसार बैठक से पहले बाजार में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना लगभग 36 फीसदी मानी जा रही थी। लेकिन अब यह दिसंबर 2018 के बाद फेड का सबसे अनिश्चित फैसला बन गया। आरडब्ल्यूए वेल्थ पार्टनर्स के सीआईओ जेपी पावर्स ने कहा, अब हर बैठक में पिछली बैठक की तुलना में ज्यादा अनिश्चितता पैदा हो रही है।
उन्होंने कहा, ऐसा लग रहा है कि अब सितंबर आएगा, शायद हम उस तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन हमें यह देखना होगा कि इस बीच आंकड़े क्या कहते हैं। जून में अमेरिका में उपभोक्ता महंगाई दर घटकर 3.5 फीसदी रह गई। मगर यह अभी भी फेड के 2 फीसदी के लक्ष्य से काफी ऊपर है। साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ा तनाव इस महीने और तीव्र हो गया है और तेल की वजह से एक और कीमत दबाव का खतरा बढ़ गया है।
बैठक के बाद एक प्रेस ब्रीफिंग में वॉर्श ने कहा कि अधिकारी तुरंत किसी भी कदम का वादा नहीं कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कीमतों का दबाव कम नहीं हुआ तो नीति निर्माता आगामी बैठक में कार्रवाई करने में नहीं हिचकिचाएंगे। फिर भी, जब वॉर्श पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे तो नीति को लेकर अनिश्चितता की चिंता एक और बुनियादी मुद्दे से और बढ़ गईं कि क्या फेड चेयरमैन के पास महंगाई को 2 फीसदी के लक्ष्य पर लाने का कोई साफ और ठोस रोडमैप है, जिसे उन्होंने एक मुश्किल लक्ष्य बताया है।
बीएनपी परिबा में अमेरिकी रणनीति और इकोनॉमिक्स के प्रमुख कैल्विन त्से ने कहा कि इस खबर के बाद लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में आए उछाल ने बाजार की तरफ से वॉर्श को साफ संदेश दे दिया कि उन्हें कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर वह कहते हैं कि वह महंगाई को लेकर सख्त हैं तो उन्होंने अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया।
सीएमई के फेडवॉच टूल के अनुसार बैठक के बाद वायदा बाजार ने सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना कुछ समय के लिए 77 फीसदी आंकी थी। लेकिन बुधवार देर तक यह घटकर लगभग 57 फीसदी रह गई। साथ ही, वह 2026 के आखिर तक दरों में लगभग 35 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना मान रहा है।
फेड के फैसले का असर अमेरिकी शेयरों पर पड़ा, जबकि कम अवधि वाली ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। कारण कि निवेशकों ने जुलाई में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद में लगाए गए अपने पहले के दांव समेट लिए। नीतिगत बैठक से पहले दरों के बढ़ने की बहुत ज्यादा संभावना मानी जा रही थी। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्याज दरें न बढ़ाना लेकिन सख्त रुख बनाए रखना आम तौर पर शेयरों के लिए नकारात्मक होता है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि उधार की लागत निवेशकों के अनुमान से ज्यादा समय तक ऊंची बनी रह सकती है। कुछ निवेशकों को यह भी चिंता है कि अभी कार्रवाई में देरी से आगे चलकर फेड को ज्यादा सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।
ट्रंप ने कई बार फेड से ब्याज दरें घटाने को कहा है, लेकिन बुधवार को उन्होंने वॉर्श की तारीफ की, भले ही वॉर्श ने दरें न बदलने का फैसला किया। वॉर्श का कहना है कि मौद्रिक नीति स्वतंत्र होनी चाहिए। कोलंबिया थ्रेडनीडल इन्वेस्टमेंट्स में फिक्स्ड इनकम और मैक्रो पोर्टफोलियो मैनेजर इद अल हुसैनी ने कहा, फेड के दरें न बढ़ाने से शेयरों को मिलने वाली राहत अक्सर बहुत कम समय के लिए होती है और यह इस अहसास के बाद खत्म हो जाती है कि महंगाई और बढ़ेगी। यह रिटर्न के लिए नुकसानदायक है, खासकर तब जब आप ऐसे मूल्यांकन से शुरुआत कर रहे हों जो सस्ते नहीं हैं।
ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना से जोखिम लेने की प्रवृत्ति घट सकती है और इक्विटी की तुलना में मनी मार्केट फंड और कम अवधि वाली ट्रेजरी जैसी सुरक्षित संपत्तियां अधिक आकर्षक बन सकती हैं। बॉन्ड बाजार के लिए बढ़ोतरी पर विराम और भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना यील्ड पर दबाव बनाए रखती है, खासकर नीति को लेकर संवेदनशील परिपक्वता वाली प्रतिभूतियां जैसे कि दो साल की ट्रेजरी पर। दर में बढ़ोतरी से उधार लेने की लागत बढ़ने की संभावना पैदा होती है, जिससे फिक्स्ड-इनकम प्रतिभूतियों को अपने पास रखने के लिए निवेशक अधिक रिटर्न की मांग करते हैं।