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पश्चिम एशिया संकट से सरकार ने लिया सबक, LPG उत्पादन के लिए 21 रिफाइनरियों को दिए नए टारगेट

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 13 अगस्त को जारी आदेश में 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए LPG उत्पादन का शेड्यूल तय किया है

Last Updated- August 16, 2026 | 11:59 AM IST
LPG Tanker
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के दौरान LPG की सप्लाई पर पड़े असर से सबक लेते हुए केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार सरकारी और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों और तेल-गैस कंपनियों के लिए LPG उत्पादन के अधिकतम लक्ष्य तय किए हैं। मकसद यह है कि अगर भविष्य में विदेशों से LPG की सप्लाई बाधित होती है, तो देश के पास घरेलू उत्पादन बढ़ाने का एक तैयार सिस्टम मौजूद रहे।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 13 अगस्त को जारी आदेश में 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए LPG उत्पादन का शेड्यूल तय किया है। इन कंपनियों की कुल उत्पादन क्षमता 63,810 टन प्रतिदिन रखी गई है। यह वित्त वर्ष 2025-26 में देश के घरेलू LPG उत्पादन से दोगुने से भी ज्यादा है और देश की रोजाना खपत का करीब 70 फीसदी बैठता है।

ये उत्पादन लक्ष्य सामान्य स्थिति में जरूरी नहीं होंगे। जब भी देश में LPG की सप्लाई पर दबाव आएगा या कमी की स्थिति बनेगी, सरकार इन कंपनियों को तय मात्रा में उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दे सकेगी।

LPG के लिए आयात पर ज्यादा निर्भर है भारत

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में कुल 3.32 करोड़ टन LPG की खपत हुई थी। यानी देश में रोजाना करीब 91,000 टन LPG की जरूरत पड़ती है। इसमें से करीब 1.31 करोड़ टन LPG का उत्पादन देश में हुआ, जो लगभग 35,900 टन रोजाना के बराबर है।

बाकी करीब 2.13 करोड़ टन LPG यानी लगभग 58,400 टन रोजाना की जरूरत आयात से पूरी हुई। इस तरह भारत अपनी LPG जरूरत का 64 फीसदी से ज्यादा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान इसी आयात निर्भरता की वजह से भारत के सामने मुश्किलें बढ़ गई थीं। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज से होकर LPG की सप्लाई प्रभावित हुई। भारत को सऊदी अरब जैसे देशों से मिलने वाली करीब 90 फीसदी LPG इसी समुद्री रास्ते से आती थी।

सप्लाई पर असर पड़ने के बाद सरकार ने मार्च में रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली कुछ धाराओं को LPG बनाने के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था। इसका मकसद घरेलू LPG उत्पादन को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना था।

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संकट के दौरान 55 हजार टन रोजाना तक पहुंचा उत्पादन

LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने उस दौरान कई आपात कदम उठाए थे। औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों को LPG की बिक्री पर शुरुआती तौर पर रोक लगाई गई और बाद में इसे धीरे-धीरे बढ़ाया गया।

घरेलू ग्राहकों के लिए सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के बीच का अंतर भी बढ़ाया गया था। साथ ही लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की ओर जाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, क्योंकि युद्ध के कारण इसकी सप्लाई पर LPG जितना असर नहीं पड़ा था।

संकट के सबसे कठिन दौर में देश में LPG का घरेलू उत्पादन करीब 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया था। जून के मध्य से आयात और सप्लाई की स्थिति सुधरने के बाद उत्पादन बढ़ाने के लिए जारी आपात निर्देश धीरे-धीरे वापस लिए गए। अब सरकार ने सिर्फ संकट के समय के लिए व्यवस्था करने के बजाय इसे स्थायी ढांचे में बदल दिया है।

रिलायंस की रिफाइनरी को सबसे बड़ा लक्ष्य

नए आदेश के तहत सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य रिलायंस इंडस्ट्रीज की पुरानी रिफाइनरी को दिया गया है। गुजरात के जामनगर स्थित 3.3 करोड़ टन सालाना क्षमता वाले घरेलू टैरिफ एरिया यानी DTA रिफाइनरी को रोजाना 18,000 टन LPG उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है।

रिलायंस की जामनगर में ही 3.52 करोड़ टन सालाना क्षमता वाली एक दूसरी रिफाइनरी है, लेकिन यह सिर्फ निर्यात के लिए है। इसके लिए LPG उत्पादन का कोई लक्ष्य तय नहीं किया गया है।

सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनियों की 18 रिफाइनरियों को मिलाकर रोजाना 31,470 टन LPG उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है।

इसके अलावा रूस की रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी की गुजरात के वाडीनार में 2 करोड़ टन सालाना क्षमता वाली रिफाइनरी को रोजाना 4,480 टन LPG उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है।

ONGC और GAIL जैसी अपस्ट्रीम गैस कंपनियों और प्रोसेसर्स को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। प्राकृतिक गैस से LPG बनाने वाली इन कंपनियों के लिए रोजाना 6,460 टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

रिफाइनरियों को स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट की तैयारी भी रखनी होगी

सरकार ने सिर्फ LPG उत्पादन बढ़ाने की जिम्मेदारी नहीं दी है, बल्कि कंपनियों को स्टोरेज, सप्लाई और ट्रांसपोर्ट की पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने को भी कहा है।

आदेश के मुताबिक, सरकारी, संयुक्त उपक्रम और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों को तय मात्रा के हिसाब से LPG के भंडारण, निकासी और परिवहन के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा विकसित करना होगा। इसके लिए वे खुद व्यवस्था कर सकती हैं या रेलवे और सड़क टैंकर जैसी दूसरी एजेंसियों की मदद ले सकती हैं।

कंपनियों को ऐसी तकनीकों और बदलावों पर भी काम करना होगा, जिनसे मौजूदा ढांचे से ज्यादा LPG बनाई जा सके। इनमें तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव होने पर नैफ्था को LPG में बदलना और फ्लूइड कैटेलिटिक क्रैकिंग यूनिट में जरूरी अपग्रेड जैसे उपाय शामिल हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि मौजूदा रिफाइनिंग ढांचे से LPG उत्पादन की क्षमता को और बढ़ाया जाए।

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जरूरत पड़ने पर सरकार सीधे बढ़ा सकेगी उत्पादन

नए ढांचे के तहत केंद्र सरकार के पास जरूरत पड़ने पर रिफाइनरियों, तेल विपणन कंपनियों और अपस्ट्रीम तेल कंपनियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश देने का अधिकार होगा।

अगर सरकार को लगता है कि घरेलू LPG की पर्याप्त उपलब्धता, सही वितरण और उचित कीमत पर सप्लाई बनाए रखने के लिए उत्पादन बढ़ाना जरूरी है, तो वह कंपनियों को तय मात्रा और तय अवधि के लिए उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकती है।

ऐसे निर्देश मिलने पर कंपनियों को तय समय के भीतर LPG उत्पादन बढ़ाना होगा। जरूरत पड़ने पर LPG बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले इनपुट की दूसरी जगहों पर होने वाली खपत पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

हर छह महीने में बदलेगा उत्पादन का शेड्यूल

सरकार ने इस व्यवस्था को स्थायी और अपडेट रखने के लिए उत्पादन शेड्यूल की समीक्षा का भी प्रावधान किया है। केंद्र सरकार हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को उत्पादन शेड्यूल अपडेट करेगी।

इसमें नई रिफाइनरियों और नई अपस्ट्रीम कंपनियों से आने वाले LPG उत्पादन को शामिल किया जा सकेगा। इसके अलावा मौजूदा रिफाइनरियों में तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर, निकासी, सप्लाई, ट्रांसपोर्ट या वितरण व्यवस्था में सुधार से अगर अतिरिक्त LPG उत्पादन संभव होता है, तो उसे भी नए शेड्यूल में जोड़ा जाएगा।

इस तरह सरकार ने हालिया LPG संकट के दौरान अपनाए गए आपात कदमों से आगे बढ़ते हुए रिफाइनरियों और तेल-गैस कंपनियों के लिए एक ऐसा स्थायी ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर देश में LPG उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा सकेगा।

(PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - August 16, 2026 | 11:34 AM IST

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