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इंडिया रेटिंग्स और फिच ने जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान घटाए

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Last Updated- December 11, 2022 | 3:32 PM IST

इंडिया रेटिंग्स और फिच भी उन एजेंसियों में शामिल हो गई, जिन्होंने वित्त वर्ष 23 में भारत के सकल घरेलू वृद्धि के अपने पहले के अनुमान में कमी कर दी है। गुरुवार को इंडिया रेटिंग एजेंसी ने कहा कि उसने वृद्धि का अनुमान 7 प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही इंडिया रेटिंग्स उन संस्थानों में शामिल हो गई, जिन्होंने अप्रैल-जून तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी होने के बाद अपना वृद्धि अनुमान घटाकर 7 प्रतिशत से नीचे कर दिया है।

इंडिया रेटिंग्स ने एक बयान में कहा, ‘पहली तिमाही में निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफसीई) और सकल नियत पूंजी सृजन (जीएफसीएफ) वृद्धि हमारे उम्मीद से बेहतर रही है। इसके बावजूद एजेंसी उम्मीद कर रही है कि सरकार के अंतिम खपत व्यय (डीएफसीई) की वृद्धि कम रहेगी और शुद्ध निर्यात की स्थिति खराब रहेगी, जिसका असर वित्त वर्ष 23 की वृद्धि पर पड़ेगा।’इंडिया रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 23 की जुलाई-सितंबर तिमाही में 7.2 प्रतिशत, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 4 प्रतिशत और फरवरी मार्च में 4.1 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है।

फिच रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष (2022-23) के लिए भारत के आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर सात कर दिया है। पहले उसने वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। फिच रेटिंग्स ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति, उच्च मुद्रास्फीति और ऊंची ब्याज दरों के कारण देश की अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ेगी। रेटिंग एजेंसी ने गुरुवार को कहा, ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था, उच्च मुद्रास्फीति और सख्त मौद्रिक नीति की पृष्ठभूमि में अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने का अंदेशा है।’ इससे पहले फिच रेटिंग्स ने जून में चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया था। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि 2023-24 में वृद्धि दर घटकर 6.7 प्रतिशत रह सकती है। पहले उसने अगले वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। 

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First Published - September 15, 2022 | 9:50 PM IST

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