अर्थव्यवस्था

चीन को पछाड़ने के लिए भारत को 8% ग्रोथ की जरूरत, Barclays ने बताया- इन सेक्टर्स में निवेश पर देना होगा जोर

IMF के आंकड़ों का हवाला देते हुए, बार्कलेज ने कहा कि 2028 तक पांच साल की अवधि में वैश्विक GDP में चीन का योगदान लगभग 26% अनुमानित है।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- October 10, 2023 | 4:10 PM IST

भारत की अर्थव्यवस्था को चीन से आगे निकलने के लिए प्रति वर्ष 8 प्रतिशत बढ़ोतरी की जरूरत है। ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक, बार्कलेज पीएलसी (Barclays Plc) ने कहा कि चीन दुनिया की अर्थव्यवस्था में सबसे अहम योगदान देता है, ऐसे में इसे पछाड़ने के लिए भारत को काफी ज्यादा निवेश की जरूरत है। विशेष रूप से परंपरागत क्षेत्र में निवेश की। बार्कलेज का यह बयान ऐसे समय आया है जब आज यानी 10 अक्टूबर को IMF ने अप्रैल-जून के दौरान उम्मीद से अधिक मजबूत खपत का हवाला देते हुए भारत के लिए अपने वित्त वर्ष 2024 के ग्रोथ अनुमान को 20 आधार अंक बढ़ाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया है।

बार्कलेज के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया ने ब्लूमबर्ग को बताया कि साउथ एशियाई देशों को माइनिंग, ट्रांसपोर्ट, यूटिलिटीज और स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए फोकस करना चाहिए। ये ऐसे सेक्टर्स हैं जिनसे व्यापक अर्थव्यवस्था पर ज्यादा मजबूत असर पड़ेगा।

बाजोरिया ने कहा कि हाल के वर्षों में टेलीकम्युनिकेशन और डिजिटल सेक्टर जैसे नए उद्योगों पर ज्यादा तवज्जो दी जा रही है और ऐसे में परंपरागत क्षेत्रों में निवेश कम हो गया है। उन्होंने कहा, पारंपरिक क्षेत्रों में क्षमता की कमी का मतलब है कि अब उन क्षेत्रों में ज्यादा निवेश की जरूरत है, खासकर सरकार की ओर से।

बढ़ेगा रोजगार और इनकम

बाजोरिया ने कहा कि विशेष रूप से पारंपरिक क्षेत्रों में ज्यादा निवेश का रोजगार और घरेलू आय पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ना चाहिए, और इससे पॉलिसी मेकर्स को इकॉनमिक ग्रोथ के लिए बेहतर पॉलिसी बनाने में मदद मिल सकती है।

2005 से 2010 के बीच वाली भारत की अर्थव्यवस्था रही थी दमदार

2005-2010 में भारत की अर्थव्यवस्था औसतन लगभग 8 प्रतिशत बढ़ी और अगर नई सरकार व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखते हुए ऐसा करने का लक्ष्य रखती है, तो अगले साल के आम चुनावों के बाद यह उस रफ्तार पर लौट सकती है, जैसा कि बार्कलेज ने पिछले महीने एक अलग रिपोर्ट में अनुमान लगाया था। इसका मतलब यह होगा कि भारत ग्लोबल ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनने और चीन के साथ अपने अंतर को कम करने की स्थिति में होगा।

ग्लोबल लेवल पर भारत से 10 प्रतिशत ज्यादा है चीन की हिस्सेदारी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों का हवाला देते हुए, बार्कलेज ने कहा कि 2028 तक पांच साल की अवधि में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में चीन का योगदान लगभग 26% अनुमानित है। इस अवधि में, 6.1% की GDP की वृद्धि दर के आधार पर भारत का योगदान 16% अनुमानित है। बार्कलेज के अनुसार, अगर भारत 8 प्रतिशत की वृद्धि करता है तो उसका योगदान चीन के करीब पहुंच जाएगा।

5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था भारत का लक्ष्य

भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाया है और चालू वित्त वर्ष में मार्च 2024 तक रिकॉर्ड 10 ट्रिलियन यानी 10 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024-25 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 3.7 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर 5 ट्रिलियन डॉलर करने की कोशिश कर रहे हैं।

बार्कलेज ने कहा कि सरकार के कैपिटल प्रोडेक्ट में निवेश की मजबूत गति को बनाए रखने की संभावना नहीं है, जिसका मतलब है कि प्राइवेट सेक्टर को इसमें कदम उठाने की आवश्यकता होगी। यह बात सोमवार को एक रिपोर्ट में गोल्डमैन सैक्स ग्रुप इंक (Goldman Sachs Group Inc.) के कमेंट से पता चलती है।

First Published : October 10, 2023 | 4:10 PM IST