facebookmetapixel
Advertisement
पश्चिम एशिया में जंग से दहला दलाल स्ट्रीट: सेंसेक्स 1048 अंक टूटा, निवेशकों के ₹6.6 लाख करोड़ डूबेभारतीय चाय पर ईरान संकट का साया: भुगतान अटके और शिपमेंट पर लगी रोक, निर्यातकों की बढ़ी चिंताकपड़ा उद्योग पर युद्ध की मार: पश्चिम एशिया के ऑर्डर अटके, तिरुपुर और सूरत के निर्यातकों की बढ़ी चिंताहोर्मुज संकट के बीच भारत ने खोला अपना ‘प्लान बी’: अमेरिका और अफ्रीका से कच्चा तेल मंगाने की तैयारीखाड़ी देशों में फंसे भारतीय विमानों की घर वापसी शुरू, 357 उड़ानें रद्द होने के बाद शुरू हुआ परिचालनपश्चिम एशिया में जंग के बीच PM मोदी ने इजरायल और खाड़ी देशों के नेताओं से की बातसुनील भारती मित्तल को ‘GSMA लाइफटाइम अचीवमेंट’ सम्मान, बार्सिलोना में वैश्विक दिग्गजों ने सराहाएयर इंडिया एक्सप्रेस में होगा नेतृत्व परिवर्तन: MD का पद छोड़ेंगे आलोक सिंह, कार्यकाल 19 मार्च को खत्म36 महारत्न व नवरत्न कंपनियों में न्यूनतम स्वतंत्र निदेशक नहीं, कॉरपोरेट गवर्नेंस में बड़ी खामियांकनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा: 8 समझौतों पर हस्ताक्षर, CEPA को जल्द अंतिम रूप देने पर बनी सहमति

भारतीय विनिर्माण में जोश: फरवरी में 4 महीने के उच्च स्तर 56.9 पर पहुंचा मैन्युफैक्चरिंग PMI

Advertisement

मजबूत घरेलू मांग और बेहतर कार्यक्षमता के चलते फरवरी में भारत का विनिर्माण पीएमआई उछलकर 56.9 पर पहुंच गया, जो चार महीनों का सबसे उच्चतम स्तर है

Last Updated- March 02, 2026 | 10:00 PM IST
PMI
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश की विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में वृद्धि फरवरी में 4 महीने के उच्चतम स्तर 56.9 पर पहुंच गई। सोमवार को जारी मासिक सर्वेक्षण के मुताबिक घरेलू मांग में मजबूत सुधार के कारण यह बढ़ोतरी हुई, हालांकि नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि में कमी देखी गई।

मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) जनवरी के 55.4 से बढ़कर फरवरी में चार महीने के उच्चतम स्तर 56.9 पर पहुंच गया। पीएमआई की भाषा में 50 से ऊपर का अंक विस्तार जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन दर्शाता है।

एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, ‘फरवरी महीने में भारत के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में पहले से ज्यादा तेजी देखने को मिली। मजबूत घरेलू ऑर्डर की वजह से उत्पादन लगातार दूसरे महीने भी तेज गति से बढ़ा।’

सर्वे में कहा गया, ‘समिति के सदस्यों के अनुसार, काम करने की दक्षता में सुधार, बाजार में मजबूत मांग, नए ऑर्डर में बढ़ोतरी और तकनीक में निवेश की वजह से उत्पादन में कुल मिलाकर अच्छी बढ़त दर्ज की गई।’

एक क्षेत्र जहां वृद्धि में कुछ कमी आई, वह नए निर्यात ऑर्डर रहे। हालांकि, जिन कंपनियों की विदेशों में बिक्री बढ़ी, उन्होंने एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और अमेरिका से ऑर्डर मिलने की बात कही।

भंडारी ने कहा, ‘नए निर्यात ऑर्डर में वृद्धि ने 2025 के मध्य में शुरू हुई धीमी गति को जारी रखा, जिससे विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन कुछ हद तक सीमित हो गया।’

कुल नए ऑर्डर में लगातार तेज बढ़ोतरी होने के कारण भारत के विनिर्माताओं ने उत्पादन बढ़ाने और भंडारण करने के लिए अतिरिक्त कच्चे माल की खरीद की। काम का दबाव बढ़ने पर कंपनियों ने कच्चे माल की खरीद तेज की, अपना भंडार बढ़ाया और अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति भी की। आने वाले एक वर्ष के लिए उत्पादन को लेकर कंपनियों का रुख सकारात्मक बना हुआ है।  लगभग 16 प्रतिशत कंपनियों ने उत्पादन बढ़ने का अनुमान जताया है, जबकि एक प्रतिशत से भी कम कंपनियों को गिरावट की आशंका है।

Advertisement
First Published - March 2, 2026 | 10:00 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement