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India EU Trade Dispute: भारत चाहे तो हम बात करने के लिए तैयार हैं- यूरोपीय यूनियन

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यूरोपीय संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि अगर भारत विवाद का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान करना चाहता है तो व्यापार संगठन फिर से बातचीत के लिए तैयार है।

Last Updated- May 04, 2025 | 10:17 PM IST
Tariffs on India
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: ShutterStock

प्रौद्योगिकी उत्पादों पर भारत द्वारा लगाए गए आयात शुल्क पर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चल रहे विवाद के बीच यूरोपीय संघ (ईयू) फिर से भारत के साथ बातचीत करने के लिए तैयार है। यूरोपीय संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि अगर भारत विवाद का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान करना चाहता है तो व्यापार संगठन फिर से बातचीत के लिए तैयार है। इस बारे में पूछे जाने पर एक अधिकारी ने कहा, ‘अगर भारत विवाद को सही मायने में खत्म करना चाहता है तो यूरोपीय संघ दोबारा बातचीत करने के लिए तैयार है।’

भारत द्वारा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) वस्तुओं पर शुल्क लगाने के कारण यह विवाद लंबे समय से जारी है। भारत साल 2014 से मोबाइल फोन, पुर्जों, टेलीफोन हैंडसेट सहित अन्य उत्पादों पर धीरे-धीरे शुल्क लगा रहा है। व्यापार संगठन के मुताबिक, ये शुल्क विश्व व्यापार संगठन के मानकों का उल्लंघन है और उसके तहत इन वस्तुओं पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाता है।

हालांकि, व्यापार संगठन ने छह साल पहले ही इस विवाद को निपटाने के लिए प्रक्रिया की शुरुआत की थी, लेकिन अप्रैल 2023 में डब्ल्यूटीओ के दूसरे सबसे बड़े न्यायाधिकरण विवाद निपटान निकाय ने यूरोपीय संघ के पक्ष में फैसला सुना दिया था और कहा था कि भारत ने वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन किया है। इसके अलावा निकाय ने भारत सरकार से प्रौद्योगिकी उत्पादों पर लगाए गए शुल्क को भी खत्म करने के लिए कहा था। मगर भारत ने तुरंत डब्ल्यूटीओ के अपील निकाय सर्वोच्च न्यायिक प्राधिकरण में इसके खिलाफ अपील की थी, जो कि निष्क्रिय है। नतीजतन, समाधान रुक गया क्योंकि अपील को अमान्य माना गया।

तब से दोनों पक्ष इस मसले को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय बातचीत कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर दोनों पक्ष जवाबी कार्रवाई के लिए भी तैयार हैं। मगर दोनों पक्ष अब तक किसी खास नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं। यूरोपीय संघ के अधिकारी ने कहा कि व्यापार संगठन ने नवंबर में अपने घरेलू कानून-प्रवर्तन विनियमन के तहत भी भारत की आईसीटी वस्तुओं पर लगे शुल्क के संबंध में सार्वजनिक परामर्श शुरू किया था, जो डब्ल्यूटीओ नियमों के साथ असंगत है। परामर्श से मिले इनपुट का उपयोग तब किया जाएगा जब भारत द्वारा लगाए गए शुल्क के जवाब में नीतिगत उपायों पर विचार होगा।

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First Published - May 4, 2025 | 10:17 PM IST

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