विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत और रूस को 2030 तक दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं और विनियामक अड़चनों जैसे मुद्दों को दूर करने की जरूरत है। विदेश मंत्री ने रूस के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
उन्होंने ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ शीर्षक वाले एक ऑनलाइन सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा, ‘आज की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में, हमारी भागीदारी और गहरी होती जा रही है।’ रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ की सराहना की और कहा कि रूस इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे का स्वागत करने के लिए उत्सुक है।
जयशंकर ने कहा कि विकसित हो रही बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिए भारत और रूस के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है, जिसमें ब्रिक्स, शांघाई सहयोग संगठन (एससीओ), जी20 और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत, रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का ‘संतुलित और समावेशी तरीके से’ समाधान करने के लिए तत्पर है। जयशंकर ने कहा, ‘भारत और रूस के बीच विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। दशकों से, हमारे पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति को आगे बढ़ाया है।’
विदेश मंत्री ने पिछले वर्ष दिसंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन की भारत यात्रा से निकले परिणामों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष वर्तमान वार्षिक व्यापार को 68.7 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर तक संतुलित और सतत तरीके से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’ इस संबंध में, उन्होंने कहा, ‘हमें भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और गैर-टैरिफ बाधाओं और विनियामक अड़चनों को दूर करने तथा कुशल भारतीय कार्यबल का उपयोग करने के प्रयासों को जारी रखना चाहिए।’
पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनजर विदेश मंत्री की ये टिप्पणियां महत्त्वपूर्ण हैं। दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच हुई वार्ता के बाद, भारत और रूस ने कई उपायों की घोषणा की, जिनमें एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने और 2030 तक वार्षिक व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने के लिए पांच वर्षीय खाका शामिल है। जयशंकर ने रूस को नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत का ‘सर्वोत्तम भागीदार’ बताया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाना है, मुझे विश्वास है कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए रूस में उसे एक विश्वसनीय भागीदार मिलेगा।’