भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे से एक अच्छी खबर आई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 5.1 फीसदी बढ़ गया है। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) मई 2026 में 122.7 पर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी महीने में 116.7 पर था। इस रफ्तार को बनाए रखने में मैन्युफैक्चरिंग, बिजली और गैस सेक्टर का सबसे बड़ा हाथ रहा है।
औद्योगिक उत्पादन में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने मई के महीने में 5.5 फीसदी की मजबूत बढ़त दर्ज की है। वहीं, बिजली और गैस सप्लाई सेक्टर में 9.9 फीसदी की शानदार तेजी देखी गई।
इसके अलावा वाटर सप्लाई, सीवरेज और वेस्ट मैनेजमेंट सेक्टर भी 5.5 फीसदी की दर से आगे बढ़ा। हालांकि, इस दौरान माइनिंग (खनन) और क्वैरीइंग सेक्टर में थोड़ी सुस्ती रही और इसमें 1.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
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अगर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को गहराई से देखें, तो इस उद्योग के कुल 23 समूहों में से 16 में पॉजेटिव बढ़त देखने को मिली है। सबसे ज्यादा फायदा इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट (बिजली के उपकरण) बनाने वाले सेक्टर को हुआ, जो 20.8 फीसदी बढ़ा। इसके बाद मोटर गाड़ियों, ट्रेलरों और सेमी-ट्रेलरों के सेक्टर में 14.5 फीसदी और बेसिक मेटल्स (बुनियादी धातुओं) में 4.6 फीसदी का उछाल आया।
सामान के इस्तेमाल के आधार पर (Use-based basis) देखें तो कैपिटल गुड्स (पूंजीगत सामान) में सबसे ज्यादा 12.9 फीसदी की ग्रोथ रही। इसके बाद कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 7.2 फीसदी, इंफ्रास्ट्रक्चर व कंस्ट्रक्शन गुड्स में 5.9 फीसदी और इंटरमीडिएट गुड्स में 5.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। साथ ही प्राइमरी गुड्स 2.6 फीसदी और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स 3.6 फीसदी बढ़े।
इस बार मंत्रालय ने गणना के तरीके में भी एक बड़ा बदलाव किया है। नई IIP सीरीज (आधार वर्ष 2022-23) के लिए अब थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की जगह आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Output PPI) का इस्तेमाल किया गया है। यह बदलाव IIP बास्केट के कुल 463 आइटम ग्रुप्स में से 234 पर लागू हुआ है, जो पूरे इंडेक्स के वजन का करीब 36.02 फीसदी हिस्सा हैं।