रिटायरमेंट के बाद जिंदगी की जरूरतें और जिम्मेदारियां पहले जैसी नहीं रहतीं। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या अब भी लाइफ इंश्योरेंस की जरूरत है, या इसे बंद कर देना चाहिए?
इसपर एक्सपर्ट का मानना है कि ऐसी स्थिति में अक्सर लोग दो गलतियां कर बैठते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि रिटायर होते ही इंश्योरेंस की जरूरत खत्म हो जाती है, जबकि कुछ लोग बिना ज्यादा सोचे सालों तक प्रीमियम भरते रहते हैं। लेकिन सच यह है कि हर रिटायर्ड व्यक्ति के लिए लाइफ इंश्योरेंस जरूरी नहीं होता।
असल फैसला इस बात से तय होता है कि रिटायरमेंट के बाद भी आपके ऊपर कौन-कौन सी आर्थिक जिम्मेदारियां बची हैं। अगर परिवार अभी भी आपकी आमदनी पर निर्भर है, कोई बड़ा लोन बाकी है या दूसरी जिम्मेदारियां हैं, तो इंश्योरेंस जारी रखना समझदारी हो सकती है। वहीं, अगर ऐसी कोई जिम्मेदारी नहीं बची है, तो हो सकता है कि इसकी जरूरत भी न रहे।
एक्सपर्ट का मानना है कि 60 साल की उम्र के बाद भी लाइफ इंश्योरेंस लेना संभव है, लेकिन इस उम्र में पॉलिसी चुनते समय सिर्फ बड़ा कवर देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। इस समय आपके सामने कई विकल्प होते हैं, जैसे टर्म प्लान, होल-लाइफ प्लान, एंडोमेंट प्लान, गारंटीड इनकम प्लान और कुछ मामलों में सिंगल प्रीमियम पॉलिसी।
OneBanc के फाउंडर विभोर गोयल के मुताबिक, हर प्लान का मकसद और फायदा अलग होता है। टर्म इंश्योरेंस सबसे ज्यादा लाइफ कवर देता है, लेकिन 60 साल के बाद इसे लेना आसान नहीं होता। यह आपकी उम्र, सेहत, आय और मेडिकल पर निर्भर करता है। साथ ही, इस उम्र में इसका प्रीमियम भी काफी महंगा हो जाता है।
वहीं, होल-लाइफ और गारंटीड रिटर्न वाले प्लान अक्सर वसीयत या एस्टेट प्लानिंग के लिए बेहतर माने जाते हैं। हालांकि, इनमें जितना पैसा निवेश किया जाता है, उसके मुकाबले मिलने वाला लाइफ कवर टर्म प्लान की तुलना में काफी कम होता है।
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रिटायरमेंट के बाद लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को जारी रखना है या बंद करना है, इसका फैसला सिर्फ इस आधार पर नहीं करना चाहिए कि बाजार में कौन-सा नया प्लान मिल रहा है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आज आपके ऊपर कौन-कौन सी आर्थिक जिम्मेदारियां और जोखिम बाकी हैं।
बजाज कैपिटल इंश्योरेंस ब्रोकिंग लिमिटेड के CEO वेंकटेश नायडू कहते हैं कि सबसे पहले खुद से एक आसान सवाल पूछिए। अगर कल आपको कुछ हो जाए, तो क्या आपका परिवार बिना इस बीमा के भी आर्थिक रूप से सुरक्षित रहेगा? अगर जवाब ‘हां’ है और आपके जीवनसाथी के पास पर्याप्त पेंशन, निवेश या नियमित आय का इंतजाम है, तो संभव है कि इस पॉलिसी की जरूरत अब पहले जैसी न रह गई हो।
इसके साथ ही यह भी देखना जरूरी है कि आपके ऊपर कोई होम लोन, पर्सनल लोन या किसी और के लिए दी गई लोन गारंटी जैसी जिम्मेदारियां तो बाकी नहीं हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही यह तय करना चाहिए कि पॉलिसी जारी रखनी है या नहीं।
हर रिटायर्ड व्यक्ति के लिए लाइफ इंश्योरेंस जरूरी नहीं होता, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसे जारी रखना या नई पॉलिसी लेना समझदारी भरा फैसला हो सकता है।
गोयल बताते हैं, “अगर आपके ऊपर अभी भी होम लोन या बिजनेस लोन बाकी है, जीवनसाथी पूरी तरह आप पर आर्थिक रूप से निर्भर है, आपने देर से परिवार शुरू किया है या भविष्य में संपत्ति का सही बंटवारा सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो लाइफ इंश्योरेंस की जरूरत बनी रह सकती है।”
वहीं, नायडू कहते हैं कि अगर परिवार में कोई ऐसा सदस्य है, खासकर कोई बच्चा, जिसे लंबे समय तक आर्थिक सहारे की जरूरत होगी, तो लाइफ इंश्योरेंस परिवार के लिए एक सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।
नायडू के मुताबिक, अगर रिटायरमेंट के बाद आपकी सेहत पहले जैसी नहीं रही है, तो पुरानी पॉलिसी को जारी रखना कई बार बेहतर विकल्प होता है। इसकी वजह यह है कि बढ़ती उम्र में नई पॉलिसी लेना न सिर्फ मुश्किल हो जाता है, बल्कि उसका प्रीमियम भी काफी ज्यादा होता है।
गोयल बताते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों के मामले में भी अक्सर दो बड़ी गलतियां देखने को मिलती हैं। पहली, बिना अपनी मौजूदा जरूरतों का आकलन किए यह मान लेना कि रिटायरमेंट के बाद अब बीमा की जरूरत नहीं है, या फिर सिर्फ आदत की वजह से सालों तक प्रीमियम भरते रहना।
वहीं, दूसरी गलती यह होती है कि कई लोग यूलिप (ULIP) या पारंपरिक बीमा पॉलिसियों को उनकी सरेंडर वैल्यू और उससे होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान को समझे बिना ही बंद कर देते हैं। ऐसे फैसले लेने से पहले पूरा कैलकुलेश करना और जरूरत पड़ने पर किसी एक्सपर्ट की राय लेना बेहतर होता है।
दोनों एक्सपर्ट इस बात पर सहमत हैं कि अगर रिटायरमेंट के बाद आपके पास पर्याप्त बचत है, बच्चे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और कोई बड़ा कर्ज भी बाकी नहीं है, तो सिर्फ लाइफ कवर के लिए महंगा प्रीमियम भरते रहना जरूरी नहीं है। ऐसे में वही पैसा रोजमर्रा के खर्च, इलाज या दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए ज्यादा काम आ सकता है।
गोयल का कहना है कि जब आप पर कोई आर्थिक रूप से निर्भर नहीं है, तो सिर्फ सुरक्षा का एहसास पाने के लिए लाइफ इंश्योरेंस खरीदने की जरूरत नहीं होती। ऐसी स्थिति में हेल्थ इंश्योरेंस, इमरजेंसी फंड और नियमित आय का मजबूत इंतजाम करना ज्यादा समझदारी भरा फैसला है।
जबकि नायडू बताते हैं कि सीधी बात यह है कि लाइफ इंश्योरेंस तभी तक जरूरी है, जब तक आपकी आय पर किसी की आर्थिक सुरक्षा टिकी हो। अगर ऐसी जिम्मेदारी नहीं बची है, तो रिटायरमेंट के बाद अपनी आर्थिक जरूरतों के हिसाब से प्राथमिकताएं बदलना बेहतर होता है।