हाल के महीनों में स्मॉल-कैप शेयरों में हुई तेज रिकवरी की वजह से स्मॉलकैप फंड में नकदी यानी तरलता का दबाव कम होकर मार्च 2024 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। 10 सबसे बड़े स्मॉलकैप फंड के मासिक स्ट्रेस-टेस्ट आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि उनके पोर्टफोलियो का 50 फीसदी हिस्सा बेचने में लगने वाला औसत समय जून में घटकर 27 दिन रह गया जो जनवरी 2026 में सबसे ज्यादा 44.2 दिन था। जून का यह आंकड़ा मार्च 2024 में उद्योग द्वारा पहली बार स्ट्रेस-टेस्ट आंकड़ों का खुलासा करने के बाद से सबसे कम है।
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी 2026 के सबसे ऊंचे स्तर के बाद से कुछ खास योजनाओं में नकदी में कमी के दबाव में काफी कमी आई है। इनमें क्वांट म्युचुअल फंड (102 से 45 दिन), टाटा म्युचुअल फंड (69 से 36 दिन) और एचडीएफसी म्युचुअल फंड (75 से 46 दिन) जैसी योजनाएं शामिल हैं।
टाटा ऐसेट मैनेजमेंट के वरिष्ठ फंड मैनेजर चंद्रप्रकाश पडियार ने कहा कि नकदी में बढ़ोतरी का मुख्य कारण बाजार की स्थितियों में बदलाव है। उन्होंने कहा, यह मुख्य रूप से बाजार के व्यवहार का मामला है। पिछले तीन-चार महीनों में बाजार में सुधार के साथ स्मॉलकैप के ट्रेडिंग वॉल्यूम में काफी बढ़ोतरी हुई है। नतीजतन, स्मॉलकैप पोर्टफोलियो को बेचने में लगने वाले अनुमानित दिनों की संख्या में काफी कमी आई है। उन्होंने यह भी कहा कि पोर्टफोलियो की कुल तरलता शेयर से जुड़े विशिष्ट कारकों जैसे कि कॉरपोरेट आय की संभावना पर भी निर्भर करती है।
निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स ज्यादातर स्मॉलकैप फंडों का बेंचमार्क है और यह अप्रैल 2026 के बाद से 26 फीसदी बढ़ गया है। उम्मीद है कि इस तेजी के कारण ट्रेडिंग वॉल्यूम में बढ़ोतरी हुई होगी। फोनपे म्युचुअल फंड के प्रमुख नीलेश डी नाइक ने कहा, पिछले एक साल या उससे ज्यादा समय में बाजार के नकदी सेगमेंट में कुल टर्नओवर में काफी बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2026 में एनएसई के नकदी सेगमेंट में रोजाना का औसत कारोबार 1.06 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2027 में अब तक यह बढ़कर 1.38 लाख करोड़ रुपये हो गया है। साथ ही, एम्फी के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले एक साल में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के औसत बाजार पूंजीकरण वाले स्मॉलकैप शेयरों की संख्या 257 से बढ़कर 310 हो गई है।
म्युचुअल फंड योजनाओं में रिकॉर्ड निवेश के बीच इन सेगमेंट में बढ़ते मूल्यांकन और तरलता यानी नकदी की चिंताओं को देखते हुए बाजार नियामक सेबी ने मासिक स्ट्रेस टेस्ट रिपोर्टिंग को अनिवार्य कर दिया है। ये योजनाएं मुख्य रूप से मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में निवेश करती हैं। हालांकि, इन योजनाओं में आने वाले शुद्ध निवेश में सितंबर 2024 के बाद शेयर बाजार में गिरावट के कारण कमी आई थी, लेकिन अब यह फिर से ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।
इक्रा एनालिटिक्स ने एक नोट में कहा, पिछले दो सालों में इस श्रेणी में निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी हुई है। इसका कारण सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये अनुशासित निवेश और भारत की लंबी अवधि की वृद्धि वाली कहानी पर भरोसा है। निवेशक एसआईपी के जरिये निवेश पसंद कर रहे हैं, जिससे उन्हें रुपये की लागत की ऐवरेजिंग का फायदा मिलता है और वे अल्पावधि में बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव और मूल्यांकन से जुड़ी चिंताओं के असर से बच जाते हैं।