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महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बफर स्टॉक, जरूरत पड़ने पर नीतियों में भी किया जा रहा बदलाव: सरकार

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वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सरकार महंगाई को काबू में रखने और आम लोगों को राहत देने के लिए लगातार जरूरी कदम उठा रही है

Last Updated- August 03, 2026 | 6:17 PM IST
WPI inflation
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

जून महीने में देश में थोक महंगाई दर यानी WPI में बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 9.87 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सरकार ने संसद में बताया कि थोक महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह वैश्विक बाजार में कच्चे माल, ऊर्जा और ईंधन की बढ़ती कीमतें हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खनिज तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, रसायनों और खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ा है।

सरकार का कहना है कि इन वैश्विक कारणों से बढ़ रहे महंगाई के दबाव को कम करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि आम लोगों पर इसका ज्यादा असर न पड़े। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सरकार महंगाई को नियंत्रित करने और लोगों को राहत देने के लिए कई उपाय कर रही है।

इन उपायों में अनाज और जरूरी खाद्य पदार्थों का पर्याप्त भंडार बनाए रखना, जरूरत पड़ने पर बाजार में अनाज उपलब्ध कराना और आवश्यक व्यापार नीतियों में बदलाव करना शामिल है।

क्या है मंहगाई कि असली वजह?

पिछले छह महीनों में आम लोगों से जुड़ी महंगाई दर यानी CPI, 4 प्रतिशत के तय लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। जनवरी से मार्च के बीच खुदरा महंगाई दर 3.1 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल से जून के दौरान यह 3.9 प्रतिशत दर्ज की गई।

वहीं, थोक महंगाई दर यानी WPI में हल्की बढ़ोतरी हुई है। मई में यह 9.68 प्रतिशत थी, जो जून में बढ़कर 9.87 प्रतिशत हो गई।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का बढ़ना है। विदेशों में तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, धातुओं, रसायनों और खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने का असर भारत के थोक बाजार पर भी पड़ा है।

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महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। इनमें जरूरी खाद्य वस्तुओं का बफर स्टॉक बनाए रखना, जरूरत के समय बाजार में अनाज उपलब्ध कराना और व्यापार नीतियों में समय-समय पर बदलाव करना शामिल है।

सरकार के इन प्रयासों का असर यह रहा है कि पिछले दो तिमाहियों में खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास या उससे नीचे बनी हुई है। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मिलकर कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि महंगाई पर नियंत्रण के साथ देश की आर्थिक विकास दर भी बनी रहे।

सरकार ने 2026-2031 के लिए तय किया नया दायरा

इसके अलावा, सरकार ने साल 2026 से 2031 तक के लिए खुदरा महंगाई दर का लक्ष्य 4 प्रतिशत तय किया है। इसके लिए 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत तक की सीमा निर्धारित की गई है।

जून 2026 में खुदरा महंगाई दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह 3.93 प्रतिशत से बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई है। इसके पीछे मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों और परिवहन से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी बताई जा रही है।

सरकार का कहना है कि वह महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए लगातार नजर बनाए हुए है। उसका प्रयास है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम से कम पड़े और आम लोगों के लिए जरूरी चीजों की कीमतें नियंत्रण में रहें।

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First Published - August 3, 2026 | 5:59 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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