भारत में सेमीकंडक्टर की मांग के अनुमान में बड़ा बदलाव किया गया है। अब साल 2030 तक यह मांग 150 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले साल जनवरी में लगाए गए अनुमान की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने यह अनुमान जताया है।
मंत्रालय को यह भी उम्मीद है कि देश में सेमीकंडक्टरों की कुल जरूरत का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा देश की एक फैब और उन 13 ओएसएटी/एटीएमपी (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली ऐंड टेस्ट/असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग ऐंड , पैकेजिंग) कंपनियों द्वारा पूरा किया जाएगा, जो सेमीकंडक्टर योजना के तहत प्रोत्साहन ले रही हैं। ये सभी कंपनियां साल 2030 तक पूरी तरह चालू हो जाएंगी। इनमें से तीन कंपनियां – माइक्रोन, काइन्स और सीजी पावर पहले ही उत्पादन शुरू कर चुकी हैं।
जनवरी 2025 में इंडियन इलेक्ट्रॉनिक्स ऐंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) ने साल 2030 में सेमीकंडक्टर की मांग 103.4 अरब डॉलर आंकी थी। आईईएसए अब एसईएमआई यानी सेमी के साथ जुड़ गया है, जो दुनिया भर के 4,000 सदस्यों की वैश्विक संस्था है। साल 2026 में भारत की सेमीकंडक्टर उत्पादों की वार्षिक मांग लगभग 64 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने मांग में इस भारी वृद्धि का कारण बताते हुए कहा, ‘हम भारत में सेमीकंडक्टर की मांग सालाना 150 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं के जरिये इलेक्ट्रॉनिक और पुर्जों पर बड़ा जोर दिया जा रहा है, जिसके 500 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। लिहाजा, इससे और अधिक तथा विभिन्न प्रकार की चिपों की आवश्यकता बढ़ेगी। एआई की मांग भी है क्योंकि देश में बड़े डेटा सेंटर बन रहे हैं, जिससे सेमीकंडक्टर चिपों में भारी वृद्धि होगी।’