कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से सिद्धरमैया के हटने और डी. के. शिवकुमार के 3 जून को पदभार संभालने के साथ ही राज्य के आर्थिक परिदृश्य पर चर्चा होने लगी है। दक्षिण के इस राज्य का आर्थिक प्रदर्शन इस नेतृत्व परिवर्तन की पृष्ठभूमि तैयार करता है। यह कोविड महामारी के झटकों से सबसे जल्दी और मजबूती के साथ उबरने वाले राज्यों में रहा है।
इसकी सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वृद्धि दर वित्त वर्ष 2022 और वित्त वर्ष 25 के बीच औसतन 8.73 प्रतिशत रही, देश की 8.25 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक है। दक्षिणी राज्यों में भी यह सबसे अधिक है। कर्नाटक की इस मजबूत वृद्धि के बल पर प्रति व्यक्ति आय भी वित्त वर्ष 20 की लगभग 2.05 लाख रुपये से बढ़ाकर वित्त वर्ष 26 में अनुमानित तौर पर 4.33 लाख रुपये पहुंचा दी है। इस तरह प्रति व्यक्ति आय के मामले में तेलंगाना को पीछे छोड़ते हुए यह देश के प्रमुख राज्यों में अग्रणी बनकर उभरा है। इसी अवधि में राष्ट्रीय जीडीपी में भी कर्नाटक की हिस्सेदारी 7.83 प्रतिशत से बढ़कर अनुमानित 9.19 प्रतिशत हो गई।
विकास की यह गाथा किसी एक सेक्टर के बल पर नहीं लिखी गई है। इसमें अलग-अलग मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वित्त वर्ष 25 में वास्तविक वृद्धि पिछले वर्ष के 5.98 प्रतिशत से बढ़कर 7.37 प्रतिशत हो गई। कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन और खनन आदि प्राथमिक क्षेत्रों में 1.62 प्रतिशत के संकुचन से उबरते हुए 5.17 प्रतिशत की वृद्धि जैसे सुधार के बल पर यह तस्वीर बदली है।
इस बीच, कर्नाटक की वित्तीय प्रोफाइल देखने से यह भी पता चलता है कि विकास की राह उधारी के बल पर नहीं बनी है। इस दौरान राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटे से काफी नीचे रहा। इससे पता चलता है कि खर्च का बड़ा हिस्सा पूंजीगत व्यय और निवेश से आया है। तीन साल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद सिद्धरमैया ने राज्य की कमान अब शिवकुमार को सौंप दी है। ऐसे में शिवकुमार के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती राज्य की विकास और वित्तीय प्राथमिकताओं को संतुलित करते हुए प्रगति की रफ्तार को बनाए रखने की है।