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रिकॉर्ड तोड़ सकता है चालू खाते का घाटा

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Last Updated- December 11, 2022 | 4:03 PM IST

वित्त वर्ष 2023 की जून तिमाही में भारत का चालू खाते का घाटा 9 साल के उच्च स्तर पर पहुंच सकता है, क्योंकि पहली तिमाही में शुद्ध निर्यात अनुपात सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 5.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है। जीडीपी के आंकड़ों में शुद्ध निर्यात अनुपात सामान्यतया भारत के लिए नकारात्मक रहता है। इसमें वस्तुओं और सेवाओं के आयात और निर्यात के बीच अंतर, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी चालू खाते के घाटे का आंकड़ा, निजी हस्तांतरण की प्राप्तियां शामिल होती हैं। इस तरह से सीएडी में विदेश में काम करने वाले भारतीयों द्वारा भेजे जाने वाले धन के साथ शुद्ध निर्यात शामिल होता है।
शुद्ध निर्यात को सीएडी का आईना माना जाता है। जून तिमाही के लिए बुधवार को जारी राष्ट्रीय खाते के आंकड़ों से पता चलता है कि यह 2013 की जून तिमाही के बाद उच्च स्तर पर है। 2013 की जून तिमाही में सीएडी जीडीपी का 4.9 प्रतिशत था, जबकि शुद्ध निर्यात जीडीपी का 5.9 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 22 की मार्च तिमाही में भारत का सीएडी, जीडीपी के 1.5 प्रतिशत के बराबर था, जबकि वित्त वर्ष 22 की पिछली तिमाही में सीएडी, जीडीपी के 2.6 प्रतिशत के बराबर था।
इक्रा लिमिटेड में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि जिंसों की कीमतें ऊंची रहनेऔर घरेलू मांग भी बढ़ने के कारणअप्रैल-जून तिमाही में सीएडी 30-32 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 3.7 प्रतिशत रहा है। यह पूरे वित्त वर्ष 2022 के सीएडी के लक्ष्य का करीब 80 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, ‘जिंसों की कम कीमत की वजह से अगस्त-सितंबर 2022 में व्यापार घाटा कम हो सकता है। हालांकि वाणिज्यिक वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात की मजबूती को वैश्विक मंदी का खतरा है, उसके बावजूद यह अहम बना हुआ है। जुलाई में बड़े पैमाने पर व्यापार घाटे के बाद हम इस बात से चिंतित हैं कि वित्त वर्ष 22 की दूसरी तिमाही में सीएडी बढ़कर जीडीपी के 4.3 से 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। उसके बाद मौसमी रूप से मजबूत निर्यात और जिंसों की कीमतों में कमी के कारण अगली दो तिमाहियों में इसमें कमी आ सकती है।’
जुलाई महीने में भारत का व्यापार घाटा 30 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, क्योंकि आयात की तुलना में निर्यात बहुत सुस्त रफ्तार से बढ़ा है। ज्यादातर विकसित देशों में मंदी के डर से वैश्विक मांग कमजोर पड़ी है।
पिछले महीने मौद्रिक नीति के बाद ब्रीफिंग में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात के साथ विदेश से भारत भेजे जाने वाले धन की वजह से चालू खाते का घाटा सतत सीमा में बने रहने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘चालू खाते का घाटा प्रबंधन के स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। हमारे आकलन के मुताबिक भारतीय रिजर्ब बैंक चालू खाते के घाटे का वित्तपोषण करने में सक्षम है।’
विदेश के वित्तपोषण को लेकर दास ने कहा कि शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) वित्त वर्ष 23 की पहली तिमाही में 13.6 अरब डॉलर रहा है, जो पिछले साल की समान तिमाही में 11.6 अरब डॉलर था। उन्होंने कहा, ‘विदेशी पोर्टफोलियो निवेश जून तिमाही में निकल रहा था, जो जुलाई में सकारात्मक हो गया।’
बढ़ा हुआ शुद्ध निर्यात भी जून तिमाही में जीडीपी वृद्धि के हिसाब से अहम है, क्योंकि जिंसों के उच्च कीमत की वजह से आयात बिल बढ़ा है। केयर रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा,  ‘वैश्विक वृद्धि में सुस्ती के डर और जिंसों के उच्च दाम के बीच शुद्ध निर्यात में गिरावट चिंता का विषय होगा।’  
 

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First Published - September 1, 2022 | 10:21 PM IST

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