ब्रिक्स देशों की भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने, जिसमें केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा यानी सीबीडीसी की संभावित इंटरऑपरेबिलिटी भी शामिल है, के भारत के प्रयास को समूह की नई दिल्ली घोषणा पत्र में जगह नहीं मिल पाई। इस वजह से स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने की 16 साल पुरानी कोशिश के लिए अभी भी कोई तय भुगतान ढांचा नहीं बन पाया है।
यह बात इसलिए अहम है क्योंकि भारत ने अपनी अध्यक्षता में ब्रिक्स एजेंडे में सीमा पार (विदेश में) भुगतान को मुख्य मुद्दा बनाया था। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अगस्त में कहा था कि ब्रिक्स देश तेज भुगतान प्रणाली और सीबीडीसी को जोड़ने के तरीकों पर चर्चा कर रहे थे। पिछले हफ्ते वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स सदस्यों और सहयोगी देशों से भुगतान प्रणाली को जोड़ने और एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने का आग्रह किया।
बीते शनिवार को ब्रिक्स नेताओं द्वारा अपनाए गए घोषणा पत्र में केवल ब्रिक्स भुगतान कार्य बल (बीपीटीएफ) के उस काम को मान्यता दी गई जो कुशल सीमा पार भुगतान प्रणाली के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने की दिशा में किया जा रहा है। यह काम कजान और रियो घोषणा पत्र में ब्रिक्स सीमा पार भुगतान पहल पर दिए गए दिशा-निर्देशों पर आधारित है।
घोषणा पत्र में कहा गया, ‘हम भुगतान और मेसेजिंग चैनलों की सीमा पार इंटरऑपरेबिलिटी पर किए गए काम और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करते हुए तथा यह मानते हैं कि हर जगह एक ही तरीका काम नहीं करता, ब्रिक्स देशों की स्थानीय मुद्राओं का इस्तेमाल करके व्यापार निपटान और निवेश को बढ़ावा देने पर हुई चर्चाओं को स्वीकार करते हैं।’ इसमें सदस्य देशों के बीच के
अंतर को भी परोक्ष रूप से रेखांकित किया गया। अगर सदस्य देशों की आधिकारिक डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाता तो एक देश में शुरू किए गए भुगतान को दूसरे देश की मुद्रा में सीधे निपटान किया जा सकता था। इससे बैंकों और तीसरे देश के भुगतान माध्यमों पर निर्भरता कम हो जाती।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि सम्मेलन से उम्मीद थी कि इसमें स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय मुद्रा में में बिलिंग और निपटान, बड़े पैमाने पर द्विपक्षीय भुगतान व्यवस्था, घरेलू स्तर पर त्वरित भुगतान नेटवर्क के बीच लिंक और केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा को जोड़ने पर और काम करने जैसे कदम शामिल हो सकते थे। उन्होंने कहा, ‘नई दिल्ली घोषणा पत्र में कोई ठोस कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया। बिना किसी तालमेल वाली कार्ययोजना के स्थानीय मुद्रा में व्यापार धीरे-धीरे बढ़ सकता है लेकिन बड़े स्तर तक पहुंचने की संभावना कम है।’
इंटरऑपरेबिलिटी देशों को अपनी मुद्राएं और वित्तीय प्रणालियां बनाए रखने देगी। दूसरी ओर, एक सामान्य ब्रिक्स मुद्रा के लिए देशों को कहीं अधिक नियंत्रण छोड़ना होगा, जिसमें मुद्रा जारी करने, विनिमय करने और समर्थन करने के तरीके पर सहमति और लगातार व्यापार घाटे या अधिशेष वाले देशों से निपटने के तरीके पर सहमति शामिल है।
विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंधों के सचिव सुधाकर दलेला ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि ब्रिक्स में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान पर चर्चा एक दशक से अधिक समय से चल रही है और यह मुद्दा नया नहीं है। दलेला ने कहा, ‘हमारा मानना है कि द्विपक्षीय व्यापार में लेनदेन लागत को कम करने के लिए स्थानीय मुद्रा निपटान एक व्यावहारिक तंत्र है। उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्रिक्स मुद्रा का कोई प्रस्ताव नहीं है।
पहले के ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों में स्थानीय मुद्रा व्यापार पर चर्चा का कालक्रम धीमा और वृद्धिशील प्रगति दिखाता है। 2010 में ब्रासीलिया में मूल चार ब्रिक नेता केवल ‘मौद्रिक सहयोग की व्यवहार्यता का अध्ययन करने, जिसमें स्थानीय मुद्रा व्यापार निपटान व्यवस्था शामिल है’ पर सहमत हुए। स्थानीय मुद्रा व्यापार निपटान की जांच के लिए यह पहली स्पष्ट शिखर स्तरीय प्रतिबद्धता थी।
2015 की उफा घोषणा में कहा गया कि ब्रिक्स ने ‘हमारी राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग का विस्तार करने की क्षमता’ को पहचाना और अधिकारियों से आपसी व्यापार में व्यापक उपयोग पर चर्चा जारी रखने के लिए कहा। 2017 की जियामेन घोषणा अधिक ठोस थी, जिसमें सदस्यों ने मुद्रा की अदला-बदली, स्थानीय मुद्रा में निपटान और स्थानीय मुद्रा में प्रत्यक्ष निवेश सहित मुद्रा सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जताई गई।
फिर ध्यान धीरे-धीरे भुगतान बुनियादी ढांचे की ओर स्थानांतरित हो गया। 2018 में राष्ट्राध्यक्षों ने वित्तीय बाजार एकीकरण को बढ़ाने और मुद्रा सहयोग जारी रखने का समर्थन किया। 2019 की ब्रासीलिया घोषणा ने ‘अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणाली पर ब्रिक्स सर्वेक्षण’ के महत्त्व को स्वीकार किया। 2020 में नेताओं ने राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली सहयोग और बीपीटीएफ पर चल रहे काम का स्वागत किया जबकि 2021 के नई दिल्ली घोषणा पत्र ने संवाद और चर्चा के माध्यम से इसके फलदायी सहयोग को स्वीकार किया।