प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि दुनिया अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की कोशिश कर रही है। इसे देखते हुए भारत सेमीकंडक्टर चिप और समाधानों के लिए वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता बनने की तैयारी कर रहा है।
नई दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया के 5वें संस्करण के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘दुनिया को चिप विनिर्माण के लिए नए और भरोसेमंद स्थान की आवश्यकता है और भारत इसके लिए खुद को तैयार कर रहा है।’
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के दूसरे चरण के तहत सरकार को लगभग 12 अरब डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। ये प्रस्ताव सेमीकंडक्टर उपकरण, सामग्री, गैस, रसायन, असेंबली, परीक्षण और पैकेजिंग इकाइयों में काम करने वाली कंपनियों से आए हैं। वैष्णव ने बताया कि ये निवेश अगले 2 से 3 वर्षों में कंपनियों द्वारा किए जाने की संभावना है।
मोदी ने कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा का दूसरा चरण नीतिगत फैसलों और सेमीकंडक्टर चिप फैब्रिकेशन तथा पैकेजिंग इकाइयों के विनिर्माण की घोषणाओं से आगे बढ़ेगा। जल्द ही भारत में बनी और पैकेज की गई चिप दुनिया भर में निर्यात की जाएगी।
तीन चिप पैकेजिंग इकाइयों माइक्रोन, काइनेस और सीजी सेमी ने पहले ही उत्पादन शुरू कर दिया है जबकि सीडीआईएल सेमीकंडक्टर की मोहाली इकाई और सूची सेमीकॉन की गुजरात इकाई में आज से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर हो गया है।
मोदी ने कहा, ‘दुनिया भर में जहां भी सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है, उसमें दशकों का प्रयास लगा है। लेकिन भारत ने एक साथ चिप डिजाइन, विनिर्माण, उपकरण विनिर्माण, सामग्री पारिस्थितिकी तंत्र, परीक्षण क्षमता पर काम किया और कम समय में ही सफलता दिखाई है।’
उन्होंने कहा कि आईएसएम के दूसरे चरण के तहत भारत यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि फैबलेस चिप कंपनियां, साथ ही सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप विकसित हों ताकि वे वैश्विक कंपनियों के साथ सहयोग कर सकें।
सितंबर 2026 तक भारत ने 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कुल संचयी निवेश के साथ 12 सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और पैकेजिंग इकाइयों को मंजूरी दी थी। आईएसएम के पहले चरण के तहत कुल लागत 76,000 करोड़ रुपये थी।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार आईएसएम के दूसरे चरण के तहत भारत में चिप डिजाइन करने वाली कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को लक्षित कर रही है।
वैष्णव ने कहा कि चिप डिजाइन आईएसएम 2.0 के छह स्तंभों में से एक होगा, जबकि अन्य स्तंभ मशीनों और सामग्रियों, फैब्रिकेशन इकाइयां, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान और विकास तथा प्रतिभा को कवर करेंगे।
वैष्णव ने कहा कि देश में रणनीतिक और वाणिज्यिक चिप डिजाइन क्षेत्र में प्रवेश करने के इच्छुक मध्यम आकार की या बड़ी घरेलू कंपनियों के लिए सरकार ने सह-निवेश या रॉयल्टी-आधारित फंडिंग और प्रोत्साहन भुगतान संरचना का प्रस्ताव दिया है।
देश में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के इच्छुक सेमीकंडक्टर उपकरण, विशेष रसायन, गैसों और सामग्री विनिर्माताओं के लिए परियोजना लागत का 30 फीसदी तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा।
कार्यक्रम में माइक्रोन टेक्नॉलजी के मुख्य कार्याधिकारी संजय मेहरोत्रा, इनफिनियन टेक्नॉलजी के मुख्य कार्याधिकारी जोचेन हैनेबेक और सेमीकंडक्टर उद्योग निकाय सेमी के सीईओ अजीत मनोचा समेत कई अन्य लोग भी शामिल हुए। मेहरोत्रा ने कहा कि माइक्रोन की साणंद इकाई ने इस साल की शुरुआत में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया था और अब वैश्विक स्तर पर ग्राहकों को डीआरएएम और नैंड मेमरी उत्पादों की आपूर्ति कर रही है।