जेफरीज में इक्विटी स्ट्रैटजी के वैश्विक प्रमुख क्रिस्टोफर वुड का कहना है कि अगर भू-राजनीतिक जोखिम नहीं हुए तो तो भारतीय शेयर बाजार से लगभग 15 प्रतिशत का रिटर्न मिल सकता है, जो मोटे तौर पर आय वृद्धि के अनुरूप होगा। गुरुग्राम में जेफरीज इंडिया फोरम के दौरान पुनीत वाधवा के साथ एक साक्षात्कार में वुड ने बताया कि विदेशियों के लिए भारत से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा देश का पूंजीगत कर है। बातचीत के मुख्य अंश:
क्या आपको लगता है कि 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत पर पहुंच जाने और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने से इक्विटी में निवेश कमजोर पड़ेगा?
यह निवेश के लिए खतरा है। मेरे विचार में, अगर फेडरल रिजर्व ने 16 सितंबर को ब्याज दरें नहीं बढ़ाई होतीं, तो बॉन्ड बाजार में बड़ी बिकवाली का जोखिम होता, जिसका इक्विटी पर भी व्यापक असर पड़ सकता था। यदि हम व्यापक रूप से 5 प्रतिशत का स्तर तोड़ते हैं, तो इससे इक्विटी के लिए जोखिम बढ़ जाएगा।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड किस स्तर पर बाजार को बेचैन कर सकती है?
बाजार तब परेशान होने लग जाएंगे जब हम वर्तमान स्तर से ऊपर जाएंगे। हम अभी एक महत्त्वपूर्ण स्तर पर हैं, लगभग 5 प्रतिशत। यदि यील्ड 5.5 से 6 प्रतिशत की ओर बढ़ती है, तो मुझे लगता है कि बाजार बहुत बेचैन हो जाएगा। शेयर बाजार बढ़ती बॉन्ड यील्ड को नजरअंदाज करना चाहता है, लेकिन 5 प्रतिशत ऐसा स्तर है जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल होता है। अमेरिकी बाजारों के इतना मजबूत बने रहने का कारण यह है कि आय वृद्धि बहुत अच्छी है।
क्या ऐसी कोई संभावना है कि आप अगले एक साल में भारत का वेटेज या अपना निवेश और घटा सकते हैं?
मैंने पिछले दो साल में पहले ही भारत में अपना निवेश कम कर दिया है। आगे अब यह इस बात पर निर्भर करेगा कि एआई थीम कैसी रहती है। पिछले साल, मैंने निश्चित रूप से, बाकी लोगों की तरह, भारत में अपने निवेश को कम कर दिया था। लेकिन इस निर्णय का कारण भारत के भीतर की घटनाओं की तुलना में बाहरी घटनाक्रम है।
बिना जापान वाले आपके एशिया पोर्टफोलियो में भारत की स्थिति क्या है?
बेंचमार्क की तुलना में, मैं थोड़ा अधिक ओवरवेट हूं। पोर्टफोलियो में उतार-चढ़ाव इसलिए आता है क्योंकि कोरियाई बेंचमार्क काफी अस्थिर हो जाता है।
भारत में आपके निवेश में बढ़ोतरी किस वजह से हो सकती है?
भारत में निवेश बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण यह होगा जब आपको लगेगा कि सेमीकंडक्टर शेयर अपने चरम पर पहुंच चुके हैं। पिछले सप्ताहांत तक, तीन शेयरों – टीएसएमसी, सैमसंग और हाइनिक्स – का एमएससीआई इंडेक्स में लगभग 29 प्रतिशत वेटेज था। इसलिए, भारत में निवेश आवंटन बढ़ाने का तब सबसे बड़ा कारण होगा कि जब आपको यह विश्वास हो जाएगा कि सेमीकंडक्टर शेयरों का वेटेज कम होने वाला है।
क्या उभरते बाजारों में भारत का पसंदीदा देश का रुतबा कम हो गया है?
एआई शेयरों का दौर शुरू होने से पहले यानी 2023 की शुरुआत में भारत ढांचागत विकास के मामले में सबसे अच्छी स्थिति में था। भारत आज भी ढांचागत वृद्धि के लिहाज से अच्छी स्थिति में है, लेकिन एआई थीम की वजह से भारत की यह कहानी अब फीकी पड़ती दिख रही है।
विदेशी निवेशकों के लिए भारत से जुड़ी बड़ी चिंताएं क्या हैं?
विदेशियों के लिए भारत से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा पूंजीगत लाभ कर का है। विदेशी निवेशकों के मामले में भारत का टैक्स सिस्टम दूसरे बाजारों की तुलना में खराब है। विदेशी इक्विटी निवेशकों के नजरिये से यह निश्चित रूप से भारत से जुड़ी एक नकारात्मक बात है।
क्या उन्हें भू-राजनीतिक मुद्दों और तेल कीमतों पर उनके असर के बीच कॉरपोरेट कमाई की चिंता नहीं है?
असल में, पिछले छह महीनों में भारत से कमाई के जो आंकड़े आए हैं, उन्होंने सकारात्मक रूप से चौंकाया है। वृद्धि उम्मीद से ज्यादा रही है। जब मैं छह महीने पहले भारत में था, तो ऋण वृद्धि 18 प्रतिशत थी। लोगों को इसकी उम्मीद नहीं थी। इसमें से कुछ हिस्सा आधार प्रभाव की वजह से है, लेकिन फिर भी यह लोगों की उम्मीद से ज्यादा है।
अगले एक साल में भारतीय बाजार से निवेशकों को कैसा रिटर्न मिल सकता है?
मुझे उम्मीद है कि रुपया-डॉलर का समीकरण भारत के पक्ष में रहेगा। अगर भू-राजनीतिक हालात का असर न हो, तो आपको लगभग 15 प्रतिशत रिटर्न मिलना चाहिए, जो मोटे तौर पर कमाई में होने वाली बढ़ोतरी के अनुरूप है।