देश में दवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वॉकहार्ट लिमिटेड विदेशी मुद्रा परिवतर्नीय बॉन्ड (एफसीसीबी) के धारकों को भुगतान करने के लिए विदेशों से पैसे जुटा सकती है।
कंपनी ने इससे पहले रकम जुटाने के लिए अपनी संपत्तियों को बेचने की कोशिश की थी पर खरीदारों में उत्साह नहीं होने के कारण कंपनी को अपना यह इरादा छोड़ना पड़ा।सूत्रों ने बताया कि मुंबई की यह दवा कंपनी पुराने एफसीसीबी धारकों को भुगतान करने के लिए नए एफसीसीबी पर विचार कर रही है।
उनके अनुसार कंपनी की दिलचस्पी विदेशों में ऋण लेने की नहीं है क्योंकि उसके खाते में इक्विटी से दोगुना ऋण है। वॉकहार्ट की 14 करोड़ डॉलर की एफसीसीबी की अवधि 25 अक्टूबर, 2009 को पूरी हो रही है। शुरुआत में परिवतर्नीय मूल्य प्रति शेयर 486 रुपये तय किया गया था।
वॉकहार्ट अपनी आयरलैंड की सब्सिडरी को बेचने की कोशिश में है पर बैंकरों ने बताया कि खरीदार कंपनी के मन मुताबिक कीमत चुकाने को राजी नहीं हो रहे हैं। उन्होंने बताया वॉकहार्ट पाइनवुड लेबोरेटरीज को या तो पूरा या फिर उसके कुछ हिस्से को बेचना चाह रही है।
इसके लिए कंपनी 520 से 710 करोड़ रुपये की मांग कर रही है पर उसे इसके लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाजार की मौजूदा हालत को देखते हुए पाइनवुड की कीमत 500 करोड़ रुपये तक हो सकती है, पर पश्चिमी देशों में इससे अधिक कीमत चुकाने को खरीदार तैयार नहीं होंगे।
एक दूसरी कंपनी जो यूरोप और अमेरिका में दवा कंपनियों का मूल्यांकन कर रही है के फार्मा अधिकारी ने बताया, ‘इजरायल की तेवा फार्मास्यूटिकल्स और नोवारतिस की जेनरिक इकाई सैनडोज समेत दुनिया की कई बड़ी दवा कंपनियों के पास नकदी की कमी नहीं है ।
और फाइजर तो जेनरिक संपत्तियां खरीदने का मन बना रही है, पर फिलहाल मंदी को देखते हुए सभी कंपनियां खरीद को लेकर सावधानी बरत रही हैं।’
वहीं एक दूसरे सूत्र ने बताया कि वॉकहार्ट निजी इक्विटी फंडों में अपनी हिस्सेदारी कम करना चाह रही है, पर सौदा पैसे को लेकर अटक जा रहा है।
इस सूत्र ने बताया, ‘अब कंपनी अपने घरेलू संपत्तियों को बेचकर पैसे जुटाने की कोशिश कर रही है। कंपनी औरंगाबाद में अपनी 250 एकड़ जमीन और पाइनवुड सब्सिडरी को बेचने की कोशिशों में जुटी हुई है।’
हालांकि वॉकहार्ट ने फंड उगाहने और संपत्ति बेचने की खबरों पर किसी टिप्पणी से इनकार कर दिया। कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया, ‘यह सूचना पूरी तरह से अटकलों पर आधारित है।’