भारत के थोक और निवेश बैंकिंग क्षेत्र के अग्रणी खिलाड़ियों में शुमार होने की कोशिश के तहत जे पी मॉर्गन चेज बैंक (इंडिया) ने स्थानीय मिड-कैप कंपनियों को भी सेवाएं देनी शुरू कर दी हैं। हालांकि यह बाजार बेहद प्रतिस्पर्द्धी है मगर जे पी मॉर्गन चेज बैंक (इंडिया) के मुख्य कार्याधिकारी माधव कल्याण ने रघु मोहन से कहा कि हरेक बैंक अलग-अलग किस्म के ग्राहकों की सेवा कर रहा है और देश में योगदान दे रहा है। मुख्य अंश:
महामारी शुरू होने के ढाई साल बाद भारत के बारे में आपकी क्या राय है?
भारत महामारी से उबर रहा है और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में उछाल है। इस समय ग्राहकों से बात करते समय हमें उनकी चार प्राथमिकताएं नजर आती हैं। पहली, उनका पूरा ध्यान वृद्धि पर है और उन्हें अवसर बढ़ने का अनुमान है। दूसरी, अस्थिरता पर नियंत्रण करना अहम है। महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अस्थिरता स्थायी बन गई है। इसलिए कंपनी जगत इसका सामना कर आपूर्ति श्रृंखला
की बाधाएं कम करने के तरीके ढूंढ रहा है। तीसरी, महामारी के कारण नवाचार बढ़ा है। हमारे ग्राहक अब सीधे ग्राहकों से संपर्क करने के डिजिटल समाधानों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। चौथी प्राथमिकता पर्यावरण, सामाजिक और कंपनी प्रशासन (ईएसजी) को तवज्जो देते हुए आगे बढ़ना है। हमारे ग्राहकों के बीच डेट और इक्टिवटी में कर्ज देने वाले टिकाऊ विकल्पों के प्रति दिलचस्पी और जागरूकता बढ़ रही है।
यहां हर विदेशी बैंक थोक संस्थागत और निवेश बैंक ही है…इस पर आप क्या कहेंगे?
इस समय गजब की दिलचस्पी है और देश में काम करने वाले विदेशी बैंक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं चाहे वे संस्थागत निवेशक हों, वित्तीय संस्थान हों या विभिन्न बाजारों की बहुराष्ट्रीय कंपनियां हों। मुझे नहीं लगता कि थोक बैंकिंग क्षेत्र में भीड़ है। हर कोई अलग-अलग तरह के ग्राहकों को सेवाएं दे रहा है और इससे देश को लाभ मिल रहा है।
आपको विदेशी वाणिज्यिक उधार का बाजार कैसा लग रहा है?
आम तौर पर जब बॉन्ड बाजार अस्थिर हो जाते हैं तब विदेशी मुद्रा ऋण बाजार भी काफी प्रभावित होता है, जैसा अभी दिख रहा है। पिछले साल बॉन्ड बाजार में 30 से अधिक निर्गम थे जबकि इस साल हमने अब तक पांच या छह निर्गम ही देखे हैं। जहां तक हेजिंग का सवाल है तो कुछ क्षेत्रों में हेजिंग कम रहेगी और कुछ में ज्यादा होगी। जिन क्षेत्रों को अधिकतर राजस्व या कर्ज स्थानीय स्तर पर मिल जाता है, उन्हें हेजिंग की इतनी जरूरत नहीं पड़ेगी। अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने पर इस दर की हेजिंग और जोखिम प्रबंधन महत्त्वपूर्ण हो जाएगा, जो पिछले दशक में नहीं था।
भारत में आपका अब तक का सफर कैसा रहा?
हमारे चेयरमैन जेमी डिमॉन कहते हैं कि हम किसी भी देश में सैकड़ों साल काम करने का इरादा लेकर जाते हैं। हमने इस देश में निवेश जारी रखा है। यहां हमारा निवेश, हमारे साथ काम करने वाले लोग और हमारे कारोबार
वाले शहर बढ़ते जा रहे हैं। भारतीय कंपनियां दुनिया भर में छा रही हैं और हम
मौकों का फायदा उठाने में उनकी मदद करते रहेंगे। पिछले तीन साल में चुनौतियों के बाद भी हमारे कॉरपोरेट और संस्थागत ग्राहकों की संख्या काफी बढ़ गई है। हम विदेश से पूंजी प्रवाह और भुगतान संभालने के लिए वित्तीय संस्थानों के प्रमुख बैंक बने रहेंगे। हम विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के साथ भी बहुत काम कर रहे हैं जो भारत के बढ़ते इक्विटी और ऋण बाजारों तक पहुंचना चाहते हैं। पिछले 3 साल में हमने यहां की मिड-कैप कंपनियों की सेवा के लिए अपने वाणिज्यिक बैंकिंग कारोबार का भी विस्तार किया है।