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‘मंदी से निपटने के लिए तैयार हैं हम’

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Last Updated- December 10, 2022 | 8:14 PM IST

वैश्विक आर्थिक मंदी के मौजूदा माहौल में टाटा स्टील को कम मांग और विदेशी इकाइयों के परिचालन में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में टाटा स्टील के मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनी की रणनीति जानने के लिए टाटा स्टील के सीएफओ कौशिक चटर्जी से बिजनेस स्टैंडर्ड की इशिता आयान दत्त ने बात की। पेश है इस बातचीत के प्रमुख अंश :
मौजूदा वित्तीय संकट को टाटा स्टील किस तरह देखती है?
कंपनी इस बारे में पूरी तरह सचेत है और यूरोपीय ऑपरेशन पर खास ध्यान दे रही है। यूरोप और अमेरिका में स्टील की मांग में भारी गिरावट आई है। हालांकि भारत में इसका उतना असर नहीं दिख रहा है। कंपनी अपनी क्षमता बढ़ाने और तमाम अवसरों का पूरी तरह उपयोग करने पर ध्यान दे रही है। सच तो यह है कि कंपनी लागत में कटौती करने के साथ ही उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि मार्जिन में सुधार आ सके।
टाटा स्टील की वित्तीय स्थिति के बारे में क्या कहना है?
हमारे पास 1.8 अरब डॉलर की नकदी है। इसलिए वित्तीय संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है।
कच्चे माल की कीमतों में हाल के दिनों में भारी गिरावट आई है। ऐसे में अगले वित्त वर्ष में मार्जिन में सुधार होगा?
भारत में कंपनी की क्षमता के मुताबिक, 100 फीसदी लौह-अयस्क का कैप्टिव भंडार है। इसके साथ ही करीब 60-70 फीसदी कोकिंग कोयले का भंडार है। लेकिन यूरोप में स्थिति अलग है। वहां कंपनी को 100 फीसदी लौह अयस्क और कोकिंग कोयले की खरीदारी करनी पड़ रही है।  हालांकि कच्चे माल की कीमतों में कमी का असर कंपनी की आय पर जरूर पड़ेगा।
कंपनी के विस्तार की क्या योजना है?
जमशेदपुर में 1 करोड़ टन क्षमता बढ़ाने की योजना पटरी पर है। उड़ीसा के मामले में कंपनी कोई फैसला करने से पहले स्थितियों का अध्ययन कर रही है। ग्रीनफील्ड परियोजना के लिए समयसीमा में कंपनी कुछ बउलाव जरूर कर सकती है।
आपके समूह को कलिंगनगर, टाइटेनियम परियोजना और सिंगुर में भी टाटा मोटर्स को समस्याओं का सामना करना पड़ा। इस बारे में आप क्या कहेंगे?
भारत में बड़ी परियोजनाओं को शुरुआत में तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना ही पड़ता है। यह केवल हमारे साथ ही नहीं, बल्कि लगभग सभी कंपनियों को ऐसी समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है।

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First Published - March 15, 2009 | 10:33 PM IST

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