जब भी विप्रो की बात होती है तो अक्सर लोगों को लगता है कि यह सिर्फ एक आईटी कंपनी है।
लेकिन 250 अरब रुपये के सालाना कारोबार वाली इस कंपनी की मौजूदगी आईटी के साथ ही कंज्यूमर केयर, लाइटिंग और फर्नीचर जैसे कारोबार में भी है। इससे कंपनी एक ही श्रेणी में होने वाले नुकसान से बची रहती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी से निपटने के लिए विप्रो की रणनीति के बारे में कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी सुरेश सी सेनापति से बातचीत की विभु रंजन मिश्रा ने। मुख्य अंश:
जोखिम कम करने के लिए विप्रो अर्थव्यवस्था के नए और पुराने मॉडलों के बीच में संतुलन बना कर काम कर रही है?
मुझे लगता है कि हम अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार कर रहे हैं। हमने कारोबार की शुरुआत वनस्पति के साथ की थी। लेकिन अब हम साबुन, फर्नीचर और आईटी जैसे क्षेत्रों में भी हैं। पहले हम भारत में गैर आईटी क्षेत्र में मौजूद थे।
फिर हमने विदेशी कंपनी उन्जा का अधिग्रहण किया और चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया, अफ्रीका और पश्चिमी एशिया के बाजार में भी कदम रखा। उम्मीद है कि जल्द ही हम अमेरिका और बाकी बाजारों के इन्फ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग कारोबारमें भी इस बाजार में कदम रखेंगे।
यानी हमारा लक्ष्य सभी कारोबारों का विकास करना है ना कि किसी कारोबार को बंद करने का। हमारे लिए अच्छी बात यह है कि इन कारोबारों के विस्तार के लिए हमारे पास पर्याप्त पूंजी है।
मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में हम अधिग्रहण और विलय जैसी परियोजना के लिए रकम जुटाने में कामयाब हो जाएंगे।
अर्थव्यवस्था में छाई मंदी में आपके मुताबिक इन क्षेत्रों में कंपनी का कारोबार कैसा रहेगा?
हम जिन तीन क्षेत्रों पर ध्यान लगा रहे हैं, वह सभी तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर आईटी क्षेत्र की ही बात करे तो इसमें भी इन्फ्रास्ट्रक्चर सेवाएं, कंसल्टिंग सर्विसेज, बीपीओ जैसी कई शाखाएं हैं, जिनका कारोबार तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में हमारा लक्ष्य इन क्षेत्रों में अपना कारोबार बढ़ाना है और उन बाजारों में पहुंचना है जहां इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
इनमें से आप फिलहाल किन क्षेत्रों पर ध्यान दे रहे हैं?
हमारा मानना है कि इन सभी क्षेत्रों में विकास की भरपूर संभावनाएं हैं, हमारा ध्यान इन सभी क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर है। मसलन, कुछ समय पहले तक हम इन्फ्रास्ट्रक्चर कारोबार में दूसरे नंबर की कंपनी थे।
लेकिन इस बाजार के विकास के साथ ही हम भी इस क्षेत्र की अग्रणी कंपनी बन गए। कंज्यूमर केयर क्षेत्र की बात करें तो संतूर इस श्रेणी में तीसरे नंबर पर है। हमने अपना फर्नीचर कारोबार भी शुरू किया था जो अच्छा खासा चल रहा है।
फिलहाल कारोबार के लिए हालात कैसे लग रहे हैं?
मेरा मानना है कि जिन क्षेत्रों में हम परिचालन कर रहे हैं , उन कारोबारों पर लंबी अवधि में इस आर्थिक मंदी का कोई असर नहीं पड़ेगा। और जब मैं ऐसा कह रहा हूं तो इसका मतलब यह है कि हम घाटे वाली श्रेणियों में कारोबार पहले ही बंद कर चुके हैं।
लेकिन इस आर्थिक मंदी का असर बीएफएसआई कारोबार पर तो पड़ा ही है?
पिछली तिमाही में तो हमारे कारोबार पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा था। यह तिमाही भी ठीक-ठाक ही रहेगी। हालांकि बीएफएसआई श्रेणी में हम जिन कंपनियों को सेवाएं मुहैया कराते हैं, उन कंपनियों पर भी इस मंदी का कोई असर नहीं पड़ा है।
इनमें से कुछ कंपनियों को और भी बड़ी कंपनियों या बैंकों ने खरीदा है। इन कंपनियों का कहना है कि अगर इन कंपनियों का काम जारी रहता है तो हमारे साथ उनका कारोबार भी पहले की तरह ही रहेगा।
दूरसंचार कारोबार पर भी मंदी का असर काफी बुरा रहा है, खास तौर पर उपकरणों की श्रेणी में। आप क्या मानते हैं?
अधिग्रहण और विलय के कारण दूरसंचार उपकरण कारोबार पिछले कुछ समय से ही बुरे दौर से गुजर रहा है।
मौजूदा हालात को देखते हुए लगता है कि यह हालात अगली दो-तीन तिमहियों तक ऐसे ही रहेंगे। दूरसंचार सेवा क्षेत्र में भी हमारे कई ग्राहक हैं, खास तौर पर उन उभरते बाजारों में जो तेजी से बढ़ रहे हैं।
आपको हालात कब तक सामान्य होने की उम्मीद है?
आर्थिक मंदी तो अभी कुछ समय तक रहेगी ही। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा कारोबार 3-4 साल के लिए पिछड़ जाएगा।
दरअसल, हमारा कारोबार अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्था पर निर्भर नहीं करता है। अगर वहां के आर्थिक हालात सुधरेंगे तो वहां की कंपनियों को भारतीय कंपनियों की सेवाओं की जरूरत होगी।
लेकिन अगर हालात सही नहीं हैं तो उन्हें लागत घटानी पड़ेगी। ऐसे में भी हमारे पास उनके लिए बेहतर सॉल्यूशन सेवाएं हैं।
क्या विप्रो में भी लागत कम करने की कवायद शुरू हो चुकी है?
यह तो हमेशा से ही होता रहा है। जहां भी फिजूल खर्च हो रहा होगा, हम वहां पर कटौती जरूर करेंगे।
हम संसाधनों का उपयोग बेहतर तरीके से करने की योजना बना रहे हैं। लेकिन हम यह जरूर देखेंगे कि जरा भी फिजूल खर्च ना किया जाए।
हाल ही में विप्रो ने अक्षय ऊर्जा के कारोबार में कदम रखा है। आपको इस बाजार में कितनी संभावना नजर आ रही है?
अभी तक हमने इस परियोजना पर काम शुरू नहीं किया है और यह बिल्कुल शुरुआत के दौर में है। लेकिन यह बात तो तय है कि हम इस कारोबार में बड़ा खिलाड़ी बनना चाहते हैं।
क्या आपके पास सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन कारोबार में कदम रखने के लिए कोई योजना है?
फिलहाल हम इस कारोबार में कंसल्टिंग सेवा ही शुरू कर रहे हैं। इस वक्त हम सौर या पवन ऊर्जा उत्पादन संयंत्र शुरू करने नहीं जा रहे हैं। लेकिन भविष्य में क्या होगा इस बारे में कुछ भी कहना मुश्किल है। हम इस बाजार में कारोबार की संभावनाओं को देखेंगे और उसके बाद ही कोई फैसला करेंगे।