सरकार देश में ग्रीन यूरिया का उत्पादन तेज करने की कोशिश कर रही है। इसके तहत वह यूरिया बनाने वाली स्थानीय कंपनियों को ग्रीन और पारंपरिक ग्रे अमोनिया की लागत में अंतर से बचाने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रही है, जिसमें सब्सिडी दिया जाना भी है।
ग्रीन यूरिया संयंत्र लगाने को लेकर आज हुई रुचि पत्र (ईओआई) से पहले की बैठक में विनिर्माताओं को सुरक्षित रखने के कई विकल्पों पर चर्चा की गई, क्योंकि उद्योग के जानकारों के मुताबिक बिना किसी मदद के ग्रीन यूरिया बनाना प्रतिस्पर्धी नहीं है।
उर्वरक विभाग ने इस सप्ताह की शुरुआत में ग्रीन यूरिया संयंत्र लगाने के लिए रुचि पत्र जारी किया था।सरकारी कंपनी पीडीआईएल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, संयुक्त सचिव केके पाठक ने हिस्सेदारों के साथ बैठक की अध्यक्षता की। ग्रीन यूरिया बनाने में मुख्य कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाले ग्रीन अमोनिया क लागत परंपरागत ग्रे अमोनिया की तुलना में बहुत ज्यादा आती है। इसकी वजह से बगैर समर्थन के ग्रीन यूरिया का उत्पादन अप्रतिस्पर्धी हो जाता है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘पूरी मूल्य श्रृंखला से संभावित कंपनियों की ऑनलाइन और ऑफलाइन भारी भागीदारी इस बात का साफ संकेत है कि वे इस पहल को जल्द ही हकीकत में बदलने के लिए बहुत उत्सुक हैं।’
रूपरेखा में कई मंत्रालयों से वित्तीय सहायता की परिकल्पना की गई है, हालांकि आवंटन अभी प्रस्ताव के रूप में हैं और उन्हें औपचारिक मंजूरी मिलनी बाकी है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) को हरित ऊर्जा बुनियादी ढांचा की गति को तेज करने के लिए 19,744 करोड़ रुपये का संभावित बजट आवंटित किया गया है खाद विभाग (डीओएफ) को हरित अमोनिया को राष्ट्रीय खाद निर्माण श्रृंखला में शामिल करने के लिए एक संस्थागत और बाजार-समानता ढांचा बनाने का काम सौंपा गया है, हालांकि इसकी भूमिका के वित्तीय पहलुओं पर अभी काम किया जाना बाकी है। बैठक में एक मुख्य चिंता हरित और पारंपरिक ग्रे अमोनिया के बीच लागत के अंतर को लेकर जताई गई। इसे दूर करने के लिए, रूपरेखा में अलग-अलग सब्सिडी व्यवस्था का प्रस्ताव दिया गया है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, भारतीय सौर ऊर्जा निगम (सेकी) एक मध्यस्थ के रूप में काम करेगा। यह उत्पादकों से ग्रीन अमोनिया खरीदेगा और इसे घरेलू खाद कंपनियों को ग्रे अमोनिया के बराबर कीमत पर आपूर्ति करेगा। भारत अभी हर साल लगभग एक करोड़ टन यूरिया का आयात करता है और कई घरेलू संयंत्र 30 साल से ज्यादा पुराने हैं।